केरल : मुखर विपक्षी नेता वी डी सतीशन अब बनेंगे मुख्यमंत्री
मनीषा
- 14 May 2026, 03:30 PM
- Updated: 03:30 PM
( तस्वीरों सहित )
तिरुवनंतपुरम, 14 मई (भाषा) व्यक्तित्व में शालीनता और विनम्रता, जनता के लिए उपलब्धता और विपक्षी नेता के तौर पर आक्रमकता, ये वो खूबियां हैं जिनकी बदौलत वी डी सतीशन केरल की सबसे ताकतवर कुर्सी पर आसीन होने जा रहे हैं।
वाम मोर्चे की सरकार में विपक्ष की आवाज रहे 61 वर्षीय सतीशन ने दक्षिण भारत के इस प्रमुख प्रदेश में कांग्रेस को मजबूती से खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई और शायद यही वजह है कि पार्टी आलाकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से नवाजने का फैसला किया।
वह भले ही 2001 से विधानसभा चुनाव जीत रहे हों, लेकिन उनके पास सरकार में रहकर काम करने का अनुभव नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री बनने से पहले ही यह कहकर सियासी परिपक्वता कर बखूबी परिचय दिया कि वह और अन्य नेता एक टीम के रूप में काम करेंगे और 'नया केरल' बनाएंगे।
सतीशन केरल की पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के पीछे अहम भूमिका निभाने वाले सतीशन ने चुनाव से ठीक पहले, वादा किया था कि अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) निर्णायक जीत हासिल नहीं करेगा, तो वह 'राजनीतिक वनवास' ले लेंगे।
चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने गठबंधन की संभावनाओं को लेकर दृढ़ भरोसा जताया था। संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा जीत गया और अब यह वादा सतीशन के उस भरोसे का संकेत ज्यादा लगता है कि परिस्थितियां पहले ही उनके पक्ष में बदल चुकी थीं।
केरल में कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए इस जीत की जड़ें 2021 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद के कठिन दौर से जुड़ी हैं, जब राहुल गांधी ने सतीशन को विपक्ष का नेता बनाया था। तब जो फैसला जोखिम भरा और अनिश्चितता वाला लग रहा था, अब पार्टी के भीतर उसे एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
सतीशन के जमीनी स्तर के काम और स्थानीय मुद्दों पर लगातार ध्यान देने से संगठन और मतदाताओं का भरोसा फिर से मजबूत हुआ।
यूडीएफ की जीत हुई, सतीशन ने एर्नाकुलम जिले की परवूर सीट बरकरार रखी, और पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे अचानक आई लहर के बजाय एक शांत और सोच-समझकर की गई वापसी बताया।
छात्र आंदोलन से उभरकर केरल की सबसे मुखर विपक्षी आवाज़ों में से एक बने वीडी सतीशन ने खुद को रणनीतिक तौर पर कुशल नेता के रूप में स्थापित किया है, जो कानूनी समझ और राजनीतिक चतुराई का संयोजन करते हुए हाल के वर्षों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा को फिर से मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।
एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर निवासी सतीशन की राजनीति में शुरुआती पकड़ एस. एच. कॉलेज, थेवरा में छात्र राजनीति में सक्रियता के जरिये बनी और बाद में उन्होंने महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में छात्र नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) में एक पदाधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल ने कांग्रेस के संगठन में उनकी पहुंच और पहचान को मजबूती दी।
उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले सतीशन का चुनावी सफर 1990 के दशक के मध्य में परवूर विधानसभा क्षेत्र से एक हार के साथ शुरू हुआ, लेकिन उन्होंने इस असफलता को जल्द ही एक नये अवसर में बदल दिया। अपने अगले प्रयास में उन्होंने शानदार जीत हासिल की और इसके बाद लगातार इस सीट को बरकरार रखते हुए दो दशक से अधिक समय में मजबूत जमीनी पकड़ बनाई।
पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के निष्ठावान समर्थक रहे सतीशन ने परवूर से 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार जीत दर्ज की। इस प्रकार विधानसभा की राजनीति में उनका 25 वर्षों से अधिक का सफर तय हुआ है।
उन्होंने वर्ष 2021 के चुनाव में 21,301 मतों के अंतर से जीत हासिल की, जो उनकी सतत चुनावी पकड़ को दर्शाता है।
पार्टी के भीतर उन्होंने संगठनात्मक भूमिकाएं भी निभाई हैं, जिनमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं।
अपनी व्यवस्थित कार्यशैली के लिये चर्चित सतीशन ने किसी भी मुद्दे पर अपनी राय रखने से पहले उसे गहराई से समझने की आदत के कारण अपनी अलग पहचान बनाई।
यह तरीका तथा विधानसभा में उनके त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप, उन्हें कांग्रेस के भीतर अपनी मजबूत स्थिति बनाने में मददगार साबित हुए।
भाषा हक हक मनीषा
मनीषा
1405 1530 तिरुवनंतपुरम