कपास आयात शुल्क से उद्योग पर प्रतिकूल असर, नीति में बदलाव की जरूरत: कपड़ा उद्योग
रमण
- 08 May 2026, 04:03 PM
- Updated: 04:03 PM
नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) कपड़ा उद्योग ने सरकार से कपास पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने की मांग करते हुए कहा है कि इसका क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। साथ ही उद्योग ने आपूर्ति की कमी के दौरान आयातित कपास तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत बतायी है। उद्योग संगठन भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (सिटी) की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
देश के के कपास क्षेत्र पर बृहस्पतिवार को जारी अध्ययन रिपोर्ट में उत्पादन, मूल्य निर्धारण, व्यापार नीति एवं वस्त्र मूल्य श्रृंखला की प्रतिस्पर्धात्मकता का विश्लेषण किया गया है। यह रिपोर्ट गर्जी और अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (आईसीएसी) ने संयुक्त रूप से तैयार की है।
'भारत में कपास की आपूर्ति, मूल्य निर्धारण एवं व्यापार नीति का आर्थिक विश्लेषण' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कपास पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क के प्रतिकूल प्रभाव को रेखांकित करते हुए आपूर्ति की कमी के दौरान आयातित कपास तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत बताई गई है। इसमें फाइबर गुणवत्ता सुधारने और घरेलू बाजार स्थितियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने की भी सिफारिश की गई है।
सिटी के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा कि रिपोर्ट 2030 तक वस्त्र एवं परिधान उद्योग के 350 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए खाका प्रस्तुत करती है। इस लक्ष्य में 100 अरब डॉलर का निर्यात शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया कि आयात शुल्क में अस्थायी राहत का प्रभाव सीमित रहा है। अगस्त से दिसंबर 2025 तक शुल्क हटाया गया था जिसे एक जनवरी 2026 से फिर लागू कर दिया गया। स्थिर और भरोसेमंद नीति आवश्यक है तथा शुल्क हटाकर मिलों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कपास उपलब्ध कराना जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को मिल को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कपास उपलब्ध कराने के लिए सशक्त बनाया जाना चाहिए। इसके लिए सीसीआई को प्रतिवर्ष लगभग 1,500 करोड़ रुपये की जरूरत होगी जिससे वह करीब 100 लाख गांठ कपास (एक गांठ बराबर 170 किलो) अंतरराष्ट्रीय कीमत से चार सेंट प्रति पाउंड कम पर उपलब्ध करा सके।
रिपोर्ट में तीन माह के रणनीतिक भंडार, गतिशील बिक्री नीति, उत्पादकता सुधार और मूल्य स्थिरीकरण कोष (पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी) की भी सिफारिश की गई है।
भारत का वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र देश में रोजगार सृजन के मामले में दूसरे स्थान पर है। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) तथा निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में वस्त्र एवं परिधान निर्यात में डॉलर के संदर्भ में वार्षिक आधार पर 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 35.79 अरब डॉलर रहा।
भाषा निहारिका रमण
रमण
0805 1603 दिल्ली