पश्चिम एशिया संकट से लागत बढ़ने से शराब कंपनियां दबाव में: उद्योग
रमण
- 07 May 2026, 07:33 PM
- Updated: 07:33 PM
नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते आपूर्ति शृंखला बाधित होने के बीच कैन एवं बोतलों की लागत बढ़ने से शराब उद्योग पर दबाव बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में उद्योग संगठनों ने राज्य सरकारों से शराब उत्पादों की कीमतों में उचित बढ़ोतरी की अनुमति मांगी है।
भारतीय शराब कंपनियों के परिसंघ (सीआईएबीसी) और ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) ने राज्यों से भारत में बने विदेशी शराब (आईएमएफएल), वाइन एवं बीयर की कीमतों में संशोधन की अनुमति देने और अंतरिम राहत उपाय लागू करने का आग्रह किया है।
बीएआई ने कहा है कि बढ़ती लागत के असर को आंशिक रूप से कम करने के लिए आपूर्तिकर्ताओं को 15-20 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाने की मंजूरी दी जाए।
बीएआई के महानिदेशक विनोद गिरि ने राज्य सरकारों को लिखे पत्र में कहा है कि पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के कारण शराब उत्पादों के कच्चे माल की लागत में तेज बढ़ोतरी हुई है। कांच की बोतल लगभग 20 प्रतिशत बढ़ गई है, कार्टन की लागत लगभग 100 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जबकि अन्य पैकेजिंग सामग्री 20-25 प्रतिशत तक महंगी हो गई है।
वाणिज्यिक एलएनजी की कमी से कांच विनिर्माता दबाव में हैं और उनके सामने आंशिक या पूर्ण रूप से उत्पादन बंद करने की स्थिति आ गई है। बीएआई ने चेतावनी दी कि आने वाले समय में कांच और कैन की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। एल्युमिनियम की बढ़ती कीमतों के कारण कैन की आपूर्ति में भी समस्या आई है।
उन्होंने कहा कि माल ढुलाई और लॉजिस्टिक लागत में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से आयात लागत और बढ़ गई है।
अंतरिम राहत के तौर पर बीएआई ने विनिर्माण शुल्क में प्रति बल्क लीटर (प्रति लीटर) तीन से पांच रुपये की कटौती किए जाने की भी मांग की है।
दूसरी तरफ, भारत में विदेशी शराब बनाने वाली कंपनियों और घरेलू शराब विनिर्माताओं के संगठन सीआईएबीसी ने भी राज्यों से मांग की है कि कारखाने से निकलते समय तय होने वाली आधार कीमत में संशोधन किया जाए।
सीआईएबीसी के महानिदेशक अनंत एस अय्यर ने कहा कि भारत के लिए आपूर्ति के प्रमुख केंद्र पश्चिम एशिया में अस्थिर भू-राजनीतिक स्थिति उद्योग में महंगाई का दबाव बढ़ा रही है।
उद्योग संगठन ने कहा कि फिरोजाबाद स्थित कांच उद्योग पर गैस आपूर्ति में कटौती का असर पड़ा है, जिससे विनिर्माताओं को महंगे स्पॉट एलएनजी या एलपीजी का सहारा लेना पड़ रहा है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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