भारत की निगाहें अंडर-17 महिला एशियाई कप में इतिहास रचने पर
सुधीर
- 07 May 2026, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
सुजोऊ (चीन), सात मई (भाषा) एशिया की दो बड़ी टीम से हारने के बाद भारतीय टीम अब शुक्रवार को यहां एएफसी अंडर-17 महिला एशियाई कप में लेबनान के खिलाफ 'करो या मरो' वाले मुकाबले में खेलने उतरेगी और उसे पता है कि इस मैच में जीत उसे पहली बार टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में जगह दिला सकती है।
ग्रुप बी में ऑस्ट्रेलिया (0-2) और जापान (0-3) से हारने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि भारत को क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के लिए अपने आखिरी मौके के रूप में अंतिम मैच में जीत दर्ज करनी होगी।
भारत नॉकआउट चरण की दौड़ में बरकरार है क्योंकि वह सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान पर रहने वाली दो टीम में से एक है।
भारत का गोल अंतर अभी -5 (माइनस 5) है जो ग्रुप सी की टीम फिलीपींस (-13) और चीनी ताइपे (-14) से बेहतर है। ये दोनों टीमें आखिरी मैच के दिन एक-दूसरे से भिड़ेंगी।
इसका मतलब है कि अगर भारतीय टीम लेबनान को हरा देती है तो ग्रुप सी की किसी भी टीम को भारत के गोल अंतर को पीछे छोड़ने के लिए बड़े अंतर से जीत हासिल करनी होगी।
इसके अलावा अगर बृहस्पतिवार शाम को वियतनाम और म्यांमा के बीच ग्रुप ए का मैच ड्रॉ पर खत्म होता है, या म्यांमा तीन से कम गोल के अंतर से जीतता है तो भारत अपनी जीत के साथ ही अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की कर लेगा, फिर चाहे ग्रुप सी का नतीजा कुछ भी हो।
भारत 21 साल बाद अपना पहला एएफसी अंडर-17 महिला एशियाई कप खेल रहा है और उसके लिए ग्रुप चरण से आगे बढ़ना एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
भारत की मुख्य कोच पामेला कोंटी को उम्मीद है कि लेबनान के खिलाफ मुकाबला पिछले दो मैचों की तुलना में बिल्कुल अलग तरह की चुनौती पेश करेगा।
इटली की कोंटी का मानना है कि मुकाबले में आक्रामक खेल दिखाना होगा क्योंकि क्वालीफाई करने के लिए दोनों ही टीम को जीतना जरूरी है।
पश्चिम एशिया की टीम लेबनान इस टूर्नामेंट में पहली बार हिस्सा ले रही है और उसने अपने अभियान की शुरुआत जापान से 0-13 की करारी हार के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1-1 से शानदार ड्रॉ खेलकर एक अंक हासिल किया।
भारतीय टीम को इस मैच की अहमियत का पूरा अंदाजा है। यह पीढ़ी दो दशकों से भी ज्यादा समय बाद भारत को एएफसी अंडर-17 महिला एशियाई कप में वापस ला रही है और क्वार्टर फाइनल में पहुंचने की संभावना एक और मील का पत्थर साबित होगी। यह साल भारतीय महिला फुटबॉल के लिए सीनियर, अंडर-20 और अंडर-17 तीनों ही स्तरों पर पहले से ही एक ऐतिहासिक साल रहा है।
हालांकि इस साल की शुरुआत में सीनियर और अंडर-20 टीमें अपने वर्ग के टूर्नामेंट में शीर्ष आठ में जगह नहीं बना पाई थीं, लेकिन अब अंडर-17 टीम के पास यह कमाल कर दिखाने का सुनहरा मौका है।
कोंटी ने कहा, ''अगर हम क्वालीफाई कर लेते हैं तो यह हर किसी के लिए और पूरे देश के लिए एक जबरदस्त उपलब्धि होगी। हमारा पूरा ध्यान देश को यह खुशी देने पर है। मैं उम्मीद करती हूं कि स्टाफ के लिए, हमारे लिए और विशेषकर खिलाड़ियों के लिए ऐसा हो जाए। ''
भाषा नमिता सुधीर
सुधीर
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