'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ: आज भी उस रात को भुलाने की कोशिश कर रहे सिमरी के निवासी
वैभव
- 07 May 2026, 02:12 PM
- Updated: 02:12 PM
(सुमीर कौल)
सिमरी (कश्मीर घाटी), सात मई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के सिमरी गांव से होकर बहने वाली नदी इसे दो हिस्सों में बांटती है, जिसके एक तरफ भारत और दूसरी तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर है।
अगर 'ऑपरेशन सिंदूर' का कोई 'ग्राउंड जीरो' होता तो वह सिमरी गांव होता, जहां एक साल पहले की उस रात को भुलाने की कोशिश कर रहे ग्रामीणों के कानों में आज भी तोप के गोलों की आवाज गूंजती है।
पहाड़ों से घिरे इस सीमावर्ती गांव से ही सेना ने छह-सात मई, 2025 की दरमियानी रात को कृष्णा गंगा नदी के पार गोले दागे थे।
यह कार्रवाई पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए शुरू की गयी थी, जिसे 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया था।
एक साल बीत चुका है, श्रीनगर से लगभग 180 किलोमीटर दूर तंगधार सेक्टर में शमशबरी पर्वतमाला की तलहटी में बसे इस सुरम्य गांव में मानो सन्नाटा पसरा हुआ है।
रोजमर्रा का जीवन भले ही पटरी पर लौट आया हो लेकिन बाहरी लोगों का स्वागत खामोशी और अविश्वास के भाव से होता है।
कई लोग यह कहकर आगे बढ़ जाते हैं कि वे केवल पहाड़ी भाषा समझते हैं।
देश के अंतिम छोर पर स्थित सिमरी गांव की आबादी 500 है और यहां लगभग 80 घर हैं।
यहां पारंपरिक मिट्टी और लकड़ी के मकानों के साथ-साथ लगभग एक दर्जन आधुनिक कंक्रीट की इमारतें भी हैं।
अगर नदी का तेज बहाव न होता, तो एक छोर से दूसरे छोर तक के लोग एक-दूसरे को जोर से चिल्लाकर अपनी बात सुना सकते थे।
नदी इस बात की भी निरंतर याद दिलाती है कि यह एक विभाजित भूमि है।
यहां के लोगों के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' सिर्फ अखबार की खबर नहीं था बल्कि यह निवासियों के सिर के ऊपर से गुजरते आग का तूफान था, जिसे उन्होंने भलीभांति महसूस किया।
गुलाम कादिर उन गिने-चुने लोगों में से हैं, जो अनिच्छा के बावजूद इस बारे में बात करने के लिए आगे आए।
कादिर ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "हमने युद्ध के बारे में सिर्फ सुना ही नहीं बल्कि गोले आसमान में बरसते देखकर हमने उसे महसूस किया।"
उन्होंने बताया कि गोलेबारी की पहली रात के बाद कुछ दिन तक बंकर ही हमारा घर रहे।
कादिर ने कहा कि उन्हें अपने गांव पर गर्व है।
सिमरी के स्थानीय माध्यमिक विद्यालय को मतदान केंद्र संख्या एक नामित किया गया है। हाथ से लिखा एक नारा आगंतुकों का स्वागत करता है, जिस पर लिखा है, 'लोकतंत्र यहीं से शुरू होता है'।
जब कादिर से पूछा गया कि देश के आखिरी गांव का निवासी होने पर कैसा अनुभव होता है, तो उन्होंने कहा, "अब आपको समझ आ गया होगा कि हमारा गांव देश का पहला गांव हैं और हम देश में लोकतंत्र के मशालवाहक हैं।"
उन्होंने कहा, "यह स्कूल सिमरी के जज्बे का प्रतीक है। सुरक्षा बाड़ द्वारा देश के बाकी हिस्सों से भौगोलिक रूप से अलग होने के बावजूद, यहां के लोग खुद को देश के लोकतंत्र के प्राथमिक संरक्षक मानते हैं। यह गांव मुख्य रूप से क्षेत्र में तैनात सेना के जवानों पर निर्भर है और कई लोग उनके लिए मजदूर के रूप में काम करते हैं।"
'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देश भर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं सिमरी में जीवन रोजमर्रा की नीरसता और इस डर के बीच संतुलन बनाता है कि उनके गांव का सुदूर होना ही उन्हें संघर्ष का केंद्र बना सकता है।
इकबाल के लिए सीमा पार से आने वाले ड्रोन, गोलाबारी से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण थे।
सेना ने ड्रोन की घुसपैठ रोकने के लिए कई बार गोलीबारी की।
उन्होंने कहा, "कुछ ड्रोन हमारे इलाके में गिरे। सेना ने उन्हें सफलतापूर्वक हटा दिया।"
इकबाल ने उन अशांत दिनों में हर तरह की राहत प्रदान करने के लिए सेना की सराहना की।
सीमा पर्यटन योजना के तहत विकसित किए गए टीटवाल क्षेत्र से आठ किलोमीटर दूर स्थित इस गांव तक पहुंचना आसान नहीं है।
यहां भूस्खलन का डर होता है और आसपास की ढलानों से बहता तेज पानी अक्सर खतरनाक होता है।
यहां बोली जाने वाली भाषा पहाड़ी है और यहां की संस्कृति व रीति-रिवाज कश्मीर के मुख्य भूभाग या उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले से भिन्न हैं।
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जिनमें करीब 100 आतंकवादी मारे गए थे।
भाषा जितेंद्र वैभव
वैभव
0705 1412 सिमरी