बंगाल चुनाव में 50,000 से अधिक मतों के अंतर वाली अधिकांश सीट भाजपा के खाते में
नरेश
- 06 May 2026, 07:33 PM
- Updated: 07:33 PM
(नमिता तिवारी)
कोलकाता, छह मई (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 207 सीटों के साथ प्रचंड जीत दर्ज करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में करीब 60 प्रतिशत ऐसी सीट अपनी झोली में डाली है, जहां हार-जीत का अंतर 50 हजार से अधिक था।
निर्वाचन आयोग के ये आंकड़े इस चुनाव में पार्टी के प्रभुत्व के पैमाने को प्रदर्शित करते हैं।
भाजपा ने सोमवार को 294-सदस्यीय विधानसभा में 207 सीट जीतकर इतिहास रच दिया और दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल करते हुए राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया।
इस चुनाव में कम से कम 39 सीट पर जीत का अंतर 50,000 मतों से अधिक रहा। इनमें से भाजपा ने 23 सीट जीतीं, तृणमूल कांग्रेस ने 15 सीट हासिल कीं, जबकि एक सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के खाते में गई। यह विश्लेषण निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों पर आधारित है।
भाजपा ने बड़े अंतर वाली सीटों पर सर्वाधिक सेंध लगाई है जबकि उन अधिकांश सीटों पर वह दूसरे स्थान पर रही जो तृणमूल कांग्रेस ने जीती।
कई व्यक्तिगत नतीजे भी इस बड़े जनादेश की झलक दिखाते हैं। माटीगारा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने तृणमूल के शंकर मालाकार को 1,04,265 मतों से हराया।
डाबग्राम-फुलबाड़ी में भाजपा उम्मीदवार शिखा चटर्जी ने तृणमूल के रंजन शील शर्मा को लगभग 98,000 मतों से हराया, जबकि इंग्लिश बाजार में अमलान भादुड़ी ने 93,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की।
हालांकि, तृणमूल ने भी कई सीट पर बड़ी जीत दर्ज की। केनिंग पूर्व में तृणमूल के एमडी बहारुल इस्लाम ने एआईएसएफ के अरबुल इस्लाम को 91,000 से अधिक मतों से हराया, जबकि गोलपोखर में एमडी गुलाम रब्बानी ने भाजपा के सरजीत बिस्वास को 83,000 से अधिक मतों से मात दी।
चोपड़ा, बालीगंज, चंचल और कोलकाता पोर्ट सीट पर भी तृणमूल के क्रमश: हमीदुल रहमान, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, प्रसून बनर्जी और फिरहाद हकीम ने 60,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की, जो इन क्षेत्रों में पार्टी को मिले मजबूत समर्थन को दर्शाता है।
भाजपा का दबदबा खासतौर पर उत्तर बंगाल के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई दिया जिनमें सिलीगुड़ी, कूच बिहार उत्तर, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवारों ने 60,000 से 70,000 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की जो मतों के मजबूत क्षेत्रीय एकीकरण को दर्शाता है।
भाजपा के लिए बंगाल अब केवल एक सीमांत राज्य नहीं रहा, बल्कि यह शासन क्षमता की एक बड़ी परीक्षा बन गया है। वहीं तृणमूल के लिए अब लड़ाई सत्ता बनाए रखने से आगे बढ़कर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को फिर से स्थापित करने की हो गई है।
भाषा सुरेश नरेश
नरेश
0605 1933 कोलकाता