मांडविया कई मुद्दों पर चर्चा के लिए एनएसएफ अधिकारियों से मिलेंगे
मोना
- 06 May 2026, 07:09 PM
- Updated: 07:09 PM
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) खेल मंत्री मनसुख मांडविया बृहस्पतिवार को जब यहां राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के प्रतिनिधियों के साथ दिन भर चलने वाली बैठक करेंगे तो डोपिंग को अपराध घोषित करना और आगामी राष्ट्रमंडल तथा एशियाई खेलों की तैयारियां चर्चा के मुख्य विषय होंगे।
एजेंडा में राष्ट्रीय खेल प्रशासन नियम को लागू करना और बड़े पैमाने पर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए भारत की तैयारी भी शामिल होगी।
यह बैठक यहां राष्ट्रीय स्टेडियम में बंद दरवाजों के पीछे होगी।
एक विश्वसनीय सूत्र ने कहा, ''जहां तक एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों का सवाल है तो यह मूल रूप से तैयारियों का जायजा लेने की प्रक्रिया है। मंत्री डोपिंग को अपराध घोषित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा करेंगे।''
मांडविया ने इस बात की वकालत की है कि राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम में संशोधन किया जाए जिससे कि प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करने वालों के लिए जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान शामिल किया जा सके। ये दंडात्मक प्रावधान 2018 के डोपिंग रोधी विधेयक के मसौदे का हिस्सा थे लेकिन भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) जैसे निकायों की आपत्तियों के बाद इन्हें हटा दिया गया था।
पिछले महीने यहां विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के वैश्विक डोपिंग रोधी इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशन्स नेटवर्क (जीएआईआईएन) के सम्मेलन में डोपिंग को अपराध घोषित करना चर्चा का प्रमुख विषय था।
वाडा के अध्यक्ष विटोल्ड बांका ने कहा था कि वह सरकारों को इस बुराई को अपराध घोषित करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे लेकिन केवल आपूर्तिकर्ताओं और भ्रष्ट कोच तथा प्रबंधकों जैसे मददगारों को ही निशाना बनाएंगे जबकि खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करेंगे।
भारत में 2018 के मसौदा विधेयक में प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करने वालों के लिए चार साल की जेल और 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान था लेकिन सरकार ने उस समय 'आपराधिक कानून के बजाय निवारक कानून' के विचार का समर्थन किया था।
वर्तमान में भारत में खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई केवल प्रतिबंधों तक सीमित है जो अपराध की गंभीरता के आधार पर आजीवन भी हो सकते हैं।
भारत पिछले तीन वर्षों से डोप उल्लंघन करने वालों की वाडा की वैश्विक सूची में शीर्ष पर रहा है।
एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए दल अभी घोषित नहीं किए गए हैं और एनएसएफ से उम्मीद की जाती है कि वे मंत्री को तैयारियों के बारे में जानकारी देंगे। राष्ट्रमंडल खेल जुलाई-अगस्त में ग्लास्गो में होंगे जबकि एशियाई खेल सितंबर-अक्टूबर में जापान में होने हैं।
एक जनवरी को आंशिक रूप से लागू किया गया राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम चर्चा का एक और अहम विषय होगा। उम्मीद है कि मंत्री एनएसएफ से अनुपालन रिपोर्ट मांगेंगे। एनएसएफ को नए कानून के मुताबिक अपने नियमों में बदलाव करने के लिए छह महीने का समय दिया गया था।
उन्हें यह भी इजाजत दी गई है कि वे सुचारू बदलाव के लिए किसी भी लंबित चुनाव प्रक्रिया को इस साल के आखिर तक टाल सकते हैं।
इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय खेल संस्थाओं की आम सभा में असाधारण प्रतिभा वाले कम से कम चार खिलाड़ियों का होने जरूरी हैं जिनमें से दो महिलाएं होनी चाहिए।
तीन सदस्यों वाला 'राष्ट्रीय खेल बोर्ड' अब भी बनना बाकी है। सरकारी अनुदान पाने के लिए एनएसएफ को इसी बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। अभी कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की एक 'खोज सह चयन' समिति उम्मीदवारों का मूल्यांकन कर रही है।
कुछ हफ्ते पहले खेल मंत्री ने 'नेशनल सेंटर फॉर स्पोर्ट्स साइंस एंड रिसर्च' (एनसीएसएसआर) को निर्देश दिया था कि वह खिलाड़ियों की समय-समय पर फिटनेस जांच के लिए हर खेल के हिसाब से खास प्रोटोकॉल तैयार करे। उम्मीद है कि इस पर भी चर्चा होगी।
एनसीएसएसआर इसके लिए 'मानक संचालन प्रक्रिया' (एसओपी) तैयार कर लेगा तो यह संस्था ही इस पूरी प्रक्रिया की एकमात्र नियामक बन जाएगी।
एनएसएफ को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे साइ से सलाह-मशविरा करके अपनी-अपनी वेबसाइट पर 'सालाना फिटनेस जांच कैलेंडर' प्रकाशित करें।
भाषा सुधीर मोना
मोना
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