कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल तीन नेताओं के बीच लामबंदी तेज
नेत्रपाल
- 06 May 2026, 02:49 PM
- Updated: 02:49 PM
तिरुवनंतपुरम, छह मई (भाषा) केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की जीत के बाद पार्टी नेता वी. डी. सतीशन, के. सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के समर्थक यह दावा कर रहे हैं कि जनता में लोकप्रियता, ज्यादा से ज्यादा विधायकों का समर्थन और पार्टी में अनुभव उनके नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त बनाता है।
केरल में नौ अप्रैल को हुए चुनाव में यूडीएफ ने भारी बहुमत हासिल करते हुए 102 सीट जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की है। इस चुनाव में यूडीएफ को 2.15 करोड़ वोट में से एक करोड़ से अधिक वोट हासिल हुए। करीब एक दशक बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस की इस जीत के बाद सभी की निगाहें पार्टी आलाकमान पर टिकी हैं जो इस बात का फैसला करेगा कि राज्य में सरकार का नेतृत्व कौन करेगा।
कांग्रेस आलाकमान ने वरिष्ठ नेताओं मुकुल वासनिक और अजय माकन को केरल के लिए पार्टी पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
यह प्रक्रिया जटिल है, क्योंकि केरल में कांग्रेस सरकार के गठन में धर्म और जाति जैसे कारक अक्सर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मुख्यमंत्री पद की दौड़ नायर समुदाय के तीन सदस्यों - चेन्निथला, वेणुगोपाल और सतीशन के बीच है।
दिलचस्प बात यह है कि ये तीनों ही कांग्रेस के दिवंगत नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री करुणाकरण के शिष्य हैं।
चेन्निथला और सतीशन ने क्रमशः हरिपाद और परवूर में अपने-अपने गढ़ों में भारी अंतर से जीत दर्ज की, वहीं कांग्रेस महासचिव (संगठन) वेणुगोपाल ने चुनाव नहीं लड़ा।
अटकलें तेज होने के साथ ही नेताओं ने पार्टी आलाकमान के प्रति अपनी निष्ठा और शक्ति का प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनके समर्थकों ने व्यापक सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से और बड़े स्वागत समारोहों का आयोजन करके अपने-अपने नेताओं के लिए प्रचार तेज कर दिया है, जैसे कि एर्नाकुलम में सतीशन और नयी दिल्ली में वेणुगोपाल के लिए समारोह आयोजित हुए।
नेहरू-गांधी परिवार के विश्वासपात्र माने जाने वाले चेन्निथला ने सोमवार को विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद कहा कि यूडीएफ की ऐतिहासिक जीत का श्रेय राहुल गांधी को जाता है। उन्होंने चुनाव पर बड़ा प्रभाव डालने वाली पांच गारंटी का श्रेय भी गांधी को ही दिया।
उन्होंने कहा, ''इस जीत के पीछे सबसे बड़ी भूमिका राहुल गांधी की रही। उन्होंने दिल्ली में सभी नेताओं को बुलाया, जीत की आवश्यकता पर चर्चा की और हमें एकजुट टीम के रूप में काम करने का मार्गदर्शन दिया। यूडीएफ ने एकजुट होकर काम किया। यह नेतृत्व राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदान किया।''
चेन्निथला ने कहा, ''प्रियंका गांधी की सक्रिय उपस्थिति और सोनिया गांधी का आशीर्वाद भी हमारे साथ था। राहुल गांधी द्वारा घोषित पांच गारंटी का चुनाव पर गहरा प्रभाव पड़ा। हम इन सभी पांच वादों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करेंगे।''
वहीं दूसरी ओर, सतीशन के समर्थक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वही मुख्यमंत्री पद के योग्य हैं। उनका कहना है कि परवूर से विधायक सतीशन ने ही 2021 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद विपक्ष के नेता के रूप में यूडीएफ का नेतृत्व करते हुए पिनराई विजयन नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) को सत्ता में बने रहने से रोका और गठबंधन को जीत दिलाई।
हालांकि, कहा जा रहा है कि सतीशन को निर्वाचित विधायकों का आवश्यक समर्थन हासिल नहीं है, लेकिन उनके खेमे का दावा है कि उनके नेता को यूडीएफ के सहयोगियों का मजबूत समर्थन प्राप्त है, जिसमें कांग्रेस नीत गठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' भी शामिल है।
सतीशन के गढ़ माने जाने वाले एर्नाकुलम जिले से दोबारा चुने गए एक कांग्रेस नेता ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''हम उन लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज़ नहीं कर सकते जिन्होंने हमें वोट दिया। वे यूडीएफ को राज्य में जीत दिलाने का श्रेय सतीशन को देते हैं।''
हालांकि, वेणुगोपाल के खेमे का दावा है कि केवल जनसमर्थन को मुख्यमंत्री के चुनाव का कारक नहीं माना जा सकता और निर्वाचित पार्टी विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण है।
राज्य की 140 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस ने 63 सीट पर जीत दर्ज की है।
भाषा सुरभि नेत्रपाल
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