एमएसएमई, विमानन कंपनियों के लिए आपातकालीन ऋण गारंटी योजना
रमण
- 05 May 2026, 09:05 PM
- Updated: 09:05 PM
नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) सरकार ने मंगलवार को एमएसएमई, एयरलाइन और अन्य कंपनियों की कार्यशील पूंजी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद के लिए 18,100 करोड़ रुपये के व्यय वाली आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की घोषणा की। पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न चुनौतियों के बीच यह कदम उठाया गया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को मंजूरी दी। इससे 2.55 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण प्रवाह उपलब्ध होने की उम्मीद है।
मंत्रिमंडल के निर्णय के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 18,100 करोड़ रुपये के व्यय वाली यह योजना पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित विमानन क्षेत्र, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) दोनों की मदद करेगी।
उन्होंने कहा कि यह योजना इन क्षेत्रों को बैंक और वित्तीय संस्थानों से अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
मंत्री के अनुसार, यात्री विमानन कंपनियां अपने अधिकतम ऋण के आधार पर 1,500 करोड़ रुपये तक की सुविधा के लिए पात्र होंगी, जबकि अन्य संस्थानों को 100 करोड़ रुपये तक की कार्यशील पूंजी का 20 प्रतिशत तक ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना से संबंधित कंपनियों को अपनी गतिविधियां जारी रखने, रोजगार सुरक्षित रखने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सरकार ने कहा कि समय पर नकदी उपलब्ध कराकर यह योजना कारोबार को स्थिर रखने और रोजगार बनाये रखने में मदद करेगी। इससे देश के उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता बनी रहेगी।
उल्लेखनीय है कि फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण एमएसएमई और विमानन क्षेत्र पर वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया है।
बयान में कहा गया , "इस योजना का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों को 100 प्रतिशत तथा गैर-एमएसएमई और विमानन क्षेत्र को 90 प्रतिशत तक ऋण गारंटी कवरेज प्रदान करना है। यह कवरेज राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋण संस्थानों को दिया जाएगा। यह गारंटी उन राशि पर लागू होगी जो अतिरिक्त ऋण सुविधा के तहत पात्र उधारकर्ताओं को दी गई है और जिनमें भुगतान में चूक की स्थिति उत्पन्न होती है, ताकि पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न अल्पकालिक नकदी असंतुलन को दूर किया जा सके।"
बयान के अनुसार ऋण की अवधि विमानन क्षेत्र के लिए वितरण तिथि से सात वर्ष होगी, जिसमें दो वर्ष की स्थगन अवधि शामिल होगी। वहीं एमएसएमई और गैर-एमएसएमई के लिए यह अवधि पांच वर्ष होगी, जिसमें एक वर्ष की स्थगन अवधि शामिल होगी।
भाषा योगेश रमण
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