15 अंक का प्रारूप 21 अंक के प्रारूप से बहुत अधिक अलग नहीं है: चिराग
सुधीर
- 05 May 2026, 06:51 PM
- Updated: 06:51 PM
नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) शीर्ष पुरुष युगल खिलाड़ी चिराग शेट्टी ने मंगलवार को कहा कि बैडमिंटन का नया 15 अंक का प्रारूप पारंपरिक 21 अंक के प्रारूप से बहुत अधिक अलग नहीं है।
पारंपरिक प्रारूप में खिलाड़ियों की सहनशक्ति की परीक्षा होती थी और यह पूर्ण चुनौती पेश करता था लेकिन चिराग ने स्वीकार किया कि छोटा प्रारूप खेल को गति और ताकत की ओर ले अधिक ले जाएगा।
विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) ने हाल ही में डेनमार्क में अपनी सालाना आम बैठक में 15 अंक के तीन गेम के प्रारूप को अपनाने की स्वीकृति दे दी। इस प्रस्ताव को डाले गए वोटों में से जरूरी दो-तिहाई बहुमत मिल गया।
नया 15 अंक का तीन गेम का प्रारूप चार जनवरी 2027 से लागू होगा और इसे भारत के पूर्व और मौजूदा खिलाड़ियों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है।
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी के साथ भारत के शीर्ष रैंकिंग वाले युगल खिलाड़ी और दो बार विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता चिराग ने कहा कि कुछ साल पहले 11 अंक के पांच गेम के प्रारूप का अनुभव करने के बाद 15 अंक की प्रणाली में बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिखता है।
भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा आयोजित एक बातचीत के दौरान चिराग ने कहा, ''मुझे लगता है कि छह या सात साल पहले वे (बीडब्ल्यूएफ) इसे 11 अंक के पांच गेम के प्रारूप में बदलने की योजना बना रहे थे। मुझे लगता है कि उस समय हम सभी खिलाड़ियों के तौर पर सामूहिक रूप से ऐसा नहीं चाहते थे क्योंकि इससे मैच खेलने का तरीका पूरी तरह से बदल जाता।''
उन्होंने कहा, ''मैंने 11 अंक के पांच गेम वाले टूर्नामेंट खेले हैं और मुझे लगता है कि वे सचमुच बहुत तेज होते थे। आपको दोबारा से लय में आने का मुश्किल से ही समय मिल पाता था क्योंकि जब तक आप असल में तैयार हो पाते तब तक आप दो गेम हार चुके होते थे।''
चिराग ने कहा, ''इसलिए मुझे लगता है कि इससे यह खेल पूरी तरह से बदल जाता। लेकिन 15 अंक का प्रारूप काफी हद तक 21 अंक वाले प्रारूप जैसा ही है। 21 अंक के तीन गेम के प्रारूप में आपकी सहनशक्ति और ताकत की परीक्षा जरूर होती थी।''
उन्होंने कहा, ''यह एक बहुत ही पूर्ण प्रारूप था लेकिन मुझे लगता है कि अब 15 अंक के तीन गेम वाला प्रारूप पूरी तरह से गति और ताकत पर आधारित होगा।''
चिराग ने कहा कि 15 अंक के तीन गेम वाला प्रारूप उनके जैसे जोरदार स्मैश लगाने वाले खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि पावर हिटिंग के लिए जिस शारीरिक मेहनत की जरूरत होती है उसे 21 अंक वाले लंबे मैच की तुलना में छोटे मुकाबलों में बनाए रखना अधिक आसान होता है।
वर्ष 2022 में इंडोनेशिया के खिलाफ भारत की थॉमस कप खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले 33 साल के एचएस प्रणय ने कहा कि वे अपनी तरफ से कुछ नहीं कह सकते। उन्होंने कहा कि लक्ष्य सेन जैसे युवा खिलाड़ी इस बारे में बेहतर राय दे सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह माना कि वे 15 अंक वाले प्रारूप के बहुत बड़े प्रशंसक नहीं हैं।
उन्होंने कहा, ''बेशक मैं 15 अंक वाले प्रारूप का बहुत बड़ा प्रशंसक नहीं हूं। मुझे लगता है कि 21 अंक वाला प्रारूप ही सबसे अच्छा था। एक खिलाड़ी के तौर पर हम सभी इस बात पर सहमत थे कि 20 मिनट के मैच में फिटनेस, गति और ताकत का एक ऐसा मेल होता था जो इसे और भी दिलचस्प बनाता था।''
प्रणय ने कहा, ''अब मुझे निश्चित तौर पर लगता है कि मैच काफी छोटे हो जाएंगे लेकिन मेरी एकमात्र चिंता यह है कि कुछ टूर्नामेंट ऐसे होते हैं जहां हवा बहुत तेज चलती है, यानी ड्रिफ्ट बहुत अधिक होता है, विशेषकर इंडोनेशिया, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में।''
उन्होंने सवाल करते हुए कहा, ''मुझे याद है कि पिछले महीने हम इंडोनेशिया में खेले थे और पहले दिन वहां बहुत अधिक हवा चल रही थी और 21 अंक वाले मैच भी 25 मिनट में ही खत्म हो रहे थे। तो मैं बस सोच रहा हूं कि ऐसी स्थितियों में 15 अंक वाले मैच का क्या होगा?''
प्रणय ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह पैसे खर्च करके मैच देखने आने वाले दर्शकों के लिए सही होगा या नहीं क्योंकि मैच बहुत जल्दी खत्म हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, ''मुझे सच में नहीं पता कि क्या यह (15 अंक के तीन गेम) उन प्रशंसकों के लिए मजेदार होगा जो कभी-कभी एक मैच देखने के लिए बहुत सारे पैसे खर्च करते हैं। हो सकता है कि कई अच्छे एकल मैच हों जो 25 मिनट में ही खत्म हो जाएं।''
प्रणय ने कहा, ''इस बात की पूरी संभावना है कि भले ही कोई दुनिया का नंबर दो या नंबर चार खिलाड़ी क्यों ना हो, अगर उसे शुरुआती पांच से सात मिनट में परिस्थितियां अनुकूल नहीं मिलीं तो वह मैच से बाहर हो जाएगा, है ना?''
उन्होंने कहा, ''यह एक बड़ी संभावना है लेकिन हमें देखना होगा। हमें बस यह देखना होगा कि जनवरी से क्या होने वाला है और जहां तक मेरी बात है तो मुझे पक्का नहीं पता कि क्या इससे मुझे कोई फायदा होगा या नहीं।''
भाषा सुधीर
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