विवेक विहार अग्निकांड : चोरी रोकने के लिए लगाई गई ग्रिल मौत का जाल बनी
अविनाश
- 04 May 2026, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में भीषण आग की चपेट में आई इमारत के भीतर फंसे लोगों को बचाने के लिए पड़ोसियों ने खासी मशक्कत की थी, लेकिन चोरों को रोकने के लिए लगाई गई लोहे की ग्रिल मौत का जाल बन गई और सड़क पर खड़े वाहनों ने भी मुश्किलें पैदा कीं। घटना के एक दिन बाद स्थानीय लोगों ने यह जानकारी दी।
विवेक विहार में रविवार तड़के एक आवासीय इमारत में भीषण आग लग गई थी, जिसमें दो परिवारों के नौ लोगों की मौत हो गई जिसमें एक बच्चा भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि संदेह है कि एयर-कंडीशनर में हुए धमाके के कारण यह आग लगी।
सोमवार को इलाके की संकरी गलियों में भारी सन्नाटा पसरा रहा। इलाके में शोक संतप्त परिवारों की सिसकियां और पुलिस की गाड़ियों व एम्बुलेंस के सायरन की आवाज़ें गूंज रही थी। स्थानीय लोग खामोश थे।
इमारत का पिछला हिस्सा तबाही की सबसे भयानक तस्वीर पेश कर रहा था। काली पड़ी दीवारें और जली हुई बालकनी आग की भयावहता की गवाही दे रही थी।
अंदर जली हुई चीज़ों के निशान और धुएं से काली पड़ी सीढ़ियां दिखाई दे रही थीं। इस दौरान फॉरेंसिक टीम और पुलिस के लोग अंदर-बाहर से घटना के बाद की स्थिति का रिकॉर्ड बना रहे थे। स्कूल से लौट रहे बच्चे वहां से गुजरते वक्त जली हुई इमारत को देखते, जहां यह दुखद घटना हुई थी।
स्थानीय लोगों ने बताया कि आग इतनी तेज़ गति से फैली कि संभलने का समय ही नहीं मिला। पास ही रहने वाली एक घरेलू सहायिका ने बताया कि वह सो रही थी और शोर से वह जगी।
उसने कहा, "जब मैंने लोगों के चिल्लाने और सायरन की आवाज़ सुनी तो मेरी आंख खुली। जब मैं बाहर निकली, तो हर तरफ घना धुआं और अफरा-तफरी थी। चोरी के डर से यहां ज़्यादातर घरों में ग्रिल लगाई गई हैं, लेकिन आज इन्हीं ग्रिल ने लोगों को बाहर निकलने से रोक दिया। यह बहुत डरावना था।"
इमारत के पिछले हिस्से में लोहे की ग्रिल लगाई गई थी, जो इस इलाके में आम बात है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इन चीज़ों ने बच निकलने के रास्ते भी बंद कर दिए।
एक निवासी ने कहा, "ये ग्रिल हमारे घरों को चोरों से बचाने के लिए थीं; इस इलाके की कई इमारतों में ऐसी ग्रिल हैं। अब लोग कह रहे हैं कि अगर ग्रिल न होती, तो वे बच सकते थे।"
एक पड़ोसी ने बताया कि किस तरह कई खामियां एक साथ आ मिलीं। उन्होंने कहा, "वहां आठ फ्लैट हैं और ज़्यादातर परिवारों के पास दो-दो गाड़ियां हैं। पार्किंग और गली पहले से ही भरी हुई थीं, और ऊपर से जन्मदिन के कारण कुछ रिश्तेदार भी आए हुए थे, जिससे गाड़ियां बढ़ गईं। यहां तक कि गार्ड भी मौजूद नहीं था, वह एक दिन पहले ही चला गया था। इन सब बातों ने मिलकर हालात ज्यादा खराब कर दिए।"
एक अन्य निवासी ने बताया कि सुरक्षा को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी।
उन्होंने कहा, "हमने 2018 में ये फ्लैट खरीदे थे; मैंने हमेशा कहा था कि एक और निकास द्वार होना चाहिए। लेकिन आपात स्थिति में क्या हो सकता है, इस बारे में कोई नहीं सोचता।"
पास की इमारत में रहने वाले एक अन्य पड़ोसी ने बताया कि फंसे लोगों की मदद के लिए जिससे जो बन पड़ा, वह किया गया। उनकी घर की खिड़कियां गर्मी के कारण चटक गई हैं।
उन्होंने कहा, "हमने ज़मीन पर गद्दे फेंके ताकि लोग कूद सकें। सोचने का समय नहीं था, हम जिसे भी बचा सकते थे, बचाने का प्रयास किया।''
बचने वालों में 25 वर्षीय वंशिका भी शामिल हैं, जो इसी इमारत की निवासी हैं और अब यहां से जाने की तैयारी कर रही हैं।
उस भयानक मंज़र को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मेरी मां की आंख पहले खुली और उन्होंने हम सबको जगाया। घर धुएं से भरा था, हमें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हमें बालकनी के रास्ते बाहर निकाला गया। पहले मैं नीचे आई, फिर मेरा परिवार। ऐसा लग रहा था कि हम नहीं बचेंगे। यह बहुत खौफनाक था।"
विवेक विहार फेज-एक की चार मंजिला इमारत में सुबह करीब 3.50 बजे आग लगी थी और यह पिछले हिस्से में तेज़ी से फैली, जिसने पहली से चौथी मंजिल तक के फ्लैटों को अपनी चपेट में ले लिया। घना धुआं भरने के कारण लोग अंदर ही फंस गए।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि आग निचली मंजिल पर एयर कंडीशनर में विस्फोट के कारण लगी हो सकती है, जिसे तेज़ हवाओं ने और भड़का दिया।
इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था जबकि छत का दरवाज़ा बंद था, जिससे लोगों के भागने का मार्ग बंद हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि घने धुएं, बंद बालकनी और लोहे की ग्रिल ने भागने की कोशिश कर रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), पुलिस और स्वयंसेवकों की टीमों के साथ दमकल की 12 गाड़ियों को काम पर लगाया गया और कई घंटों के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
भाषा नोमान नोमान अविनाश
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