स्टालिन: द्रमुक की लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का जिन्हें था पूरा विश्वास
नरेश
- 04 May 2026, 08:20 PM
- Updated: 08:20 PM
(फोटो के साथ)
चेन्नई, चार मई (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के प्रमुख एम.के. स्टालिन ने विश्वास जताया था कि वह 2026 में एक ऐसा कारनामा कर दिखाएंगे, जो उनके पिता और द्रविड़ आंदोलन के दिग्गज नेता रहे एम. करुणानिधि अपने 50 से अधिक वर्ष के राजनीतिक करियर में नहीं कर पाए यानी द्रमुक को लगातार दूसरी बार चुनावी जीत दिलाना।
हालांकि सोमवार को स्टालिन की पार्टी न केवल दो साल पुरानी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) से हार गई बल्कि उन्हें खुद भी अपने दशकों लंबे राजनीतिक करियर में पहली बार एक चौंकाने वाली हार का सामना करना पड़ा।
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था। सोमवार को मतगणना के रूझान सामने आने के साथ-साथ द्रमुक की निराशा बढ़ती गई।
साल 1953 में जन्मे स्टालिन को आपातकाल के दौरान कठोर आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे पार्टी में उनका कद बढ़ता चला गया।
पार्टी में जमीनी स्तर पर कई दशकों तक काम करने के बाद स्टालिन ने द्रमुक की युवा शाखा को इसके सचिव के रूप में मजबूत राजनीतिक ताकत में बदल दिया। इसके बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा और 1989 में वह चेन्नई के थाउजेंड लाइट्स निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा सदस्य चुने गए।
साल 1996 के विधानसभा चुनाव में वह फिर से उसी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बने। साल 2001 और 2006 में भी उन्होंने थाउजेंड लाइट्स से जीत हासिल की।
स्टालिन 1996 से 2002 तक चेन्नई महापौर रहे।
साल 2011 में, द्रमुक प्रमुख स्टालिन ने कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। इसके बाद 2016 में वह इसी सीट पर 40,000 से अधिक मतों के अंतर से विजयी हुए।
साल 2021 के विधानसभा चुनावों में स्टालिन ने फिर से कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और 75,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
उन्होंने अपनी पार्टी के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस को प्रभावशाली जीत दिलाई और 10 साल के बाद द्रमुक की सरकार बनी।
इसके बाद उन्होंने सात मई 2021 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
स्टालिन कुल मिलाकर सात बार विधायक रहे और वह तमिलनाडु विधानसभा में दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
साल 2018 में, स्टालिन के पिता दिग्गज नेता एम करुणानिधि के निधन के बाद पार्टी नेतृत्व में एक खालीपन पैदा हो गया।
अपने व्यापक अनुभव और मजबूत नेतृत्व गुणों की वजह से स्टालिन को सर्वसम्मति से द्रमुक का अध्यक्ष चुना गया और वह आज भी इस पद पर बरकरार हैं।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश
0405 2020 चेन्नई