केरल में एलडीएफ की हार 'विजयन युग' का अंत
नरेश
- 04 May 2026, 07:12 PM
- Updated: 07:12 PM
तिरुवनंतपुरम, चार मई (भाषा) केरल के राजनीतिक इतिहास में चार मई, 2026 को एक निर्णायक क्षण के रूप में देखा जा सकता है, जो न केवल माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की हार को चिह्नित करता है बल्कि राज्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक पिनराई विजयन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ भी है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) में प्रभावशाली नेता रहे एवं लगातार दो कार्यकाल मुख्यमंत्री के रूप में बिताने के बाद विजयन की सत्ता का लंबा दौर एक निर्णायक चुनावी हार के साथ समाप्त माना जा रहा है।
81 वर्षीय विजयन एक साधारण, श्रमिक वर्ग की पृष्ठभूमि से उठकर केरल का नेतृत्व करने के लिए ऐसे समय में आगे बढ़े जब उनकी पार्टी माकपा स्वयं अपने पुराने नेतृत्व ढांचे में बदलाव कर रही थी, जो संगठन के भीतर एक पीढ़ीगत और सामाजिक बदलाव का प्रतीक रहा।
इन वर्षों में, विजयन सत्ता के एक निर्विवाद केंद्र के रूप में उभरे, जिन्होंने पार्टी और सरकार दोनों को एक मजबूत पकड़ के साथ चलाया।
विजयन पहली बार 2016 में और 2021 में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। लगातार दूसरे मुख्यमंत्री कार्यकाल के लिए चुना जाना उन्हें केरल के राजनीतिक इतिहास में एक अलग पहचान दिलाता है।
एक दृढ़ और अनुशासित नेता के रूप में पहचाने जाने वाले विजयन ने माकपा के प्रदेश सचिव के रूप में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में ख्याति अर्जित की।
वर्ष 2026 में, विजयन ने एक बार फिर विधानसभा चुनाव में वामपंथी दलों का नेतृत्व किया और लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का प्रयास किया। लेकिन इस बार हालात पलट गए और माकपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को कई क्षेत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिनमें विजयन के गृह जिले कन्नूर के कई पारंपरिक गढ़ भी शामिल हैं।
विजयन का जन्म 1944 में कन्नूर जिले के पिनराई में मुंडायिल कोरन और कल्याणी के घर हुआ था।
थलस्सेरी के ब्रेनन कॉलेज में अर्थशास्त्र में बीए की पढ़ाई के दौरान विजयन केरल छात्र संघ के कन्नूर जिला सचिव बने। उच्च शिक्षा जारी रखने से पहले उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद एक वर्ष तक हथकरघा बुनकर के रूप में भी काम किया था।
भाष शफीक नरेश
नरेश
0405 1912 तिरुवनंतपुरम