लद्दाख में 75 साल बाद भगवान बुद्ध के अवशेषों के लाए जाने के उपलक्ष्य में मठों में विशेष प्रार्थनाएं
नरेश
- 01 May 2026, 08:31 PM
- Updated: 08:31 PM
(तस्वीरों के साथ)
(भास्कर मुखर्जी)
लेह, एक मई (भाषा)लद्दाख में 75 वर्ष के अंतराल के बाद भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरवा अवशेष लाए जाने के उपलक्ष्य में केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न मठों में विशेष प्रार्थनाएं और अनुष्ठान हो रहे हैं।
भिक्षुओं और भक्तों ने इस अवसर को गहन आध्यात्मिक और वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
थिकसे मठ में भिक्षु प्रार्थना के लिए एकत्रित हुए। हालांकि, पवित्र अवशेषों को इस मठ में लाए जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है।
एक भिक्षु ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि मठ में सार्वभौमिक शांति और कल्याण के लिए प्रार्थना की जा रही है। उन्होंने कहा, ''भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरावा अवशेष को शायद हमारे मठ में न लाया जाए, लेकिन हम भगवान बुद्ध से दुनिया में शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।''
भिक्षु ने कहा कि बौद्ध संस्कृति में पहले से ही सबसे महत्वपूर्ण बुद्ध पूर्णिमा के त्योहार को इस वर्ष लद्दाख में पवित्र अवशेषों की उपस्थिति ने और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
उन्होंने कहा, ''बुद्ध पूर्णिमा हमारे लिए सबसे बड़ा त्योहार है। इस बार यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अवशेष लेह और लद्दाख में हैं। थिकसे सहित कई मठ विशेष प्रार्थनाएं आयोजित कर रहे हैं।''
एक अन्य भिक्षु ने इस अवसर को भक्तों के लिए एक दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर बताया। उन्होंने कहा, ''बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लोगों के पास भगवान बुद्ध के अवशेषों के दर्शन करने का सुनहरा अवसर है।''
भिक्षुओं ने उम्मीद जताई कि पवित्र अवशेषों की उपस्थिति ऐसे समय में दुनिया भर में शांति का संदेश भेजेगी जब कई क्षेत्रों में अशांति देखी जा रही है।
एक अन्य भिक्षु ने कहा, ''दुनिया अशांत दौर से गुजर रही है, लेकिन हमारा मानना है कि लद्दाख में इन अवशेषों की उपस्थिति शांति का संदेश फैलाएगी।''
उन्होंने सात दशक पहले की ऐतहासिक घटना को याद करते हुए कहा कि इन अवशेषों को पहली बार 1950 में लेह लाया गया था, लेकिन सड़क संपर्क की कमी और सीमित पहुंच के कारण कई लोग इनके दर्शन नहीं कर पाए थे।
भिक्षुक ने कहा, ''1950 में खराब संपर्क के कारण कई लोग इन पवित्र अवशेषों का दर्शन नहीं कर पाए थे। अब, 2026 में, बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ है, और बड़ी संख्या में लोग इनके दर्शन कर सकेंगे क्योंकि पवित्र अवशेष 15 दिनों तक लद्दाख में रहेंगे।''
अधिकारियों ने बताया कि अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अवशेषों को लद्दाख के विभिन्न स्थानों पर ले जाया जाएगा।
एक अधिकारी ने करीब सात दशक के बाद अवशेषों को लद्दाख लाने के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा, '' हम अवशेषों को यहां लाने और हमारी अंतरात्मा की आवाज सुनने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आभारी हैं।''
उन्होंने कहा कि दिल्ली से लेह पवित्र अवशेषों को लाने के घटनाक्रम को अपार जनसमर्थन मिला है।
उन्होंने कहा, ''दिल्ली से लेकर लेह तक, स्कूली बच्चों सहित हर समुदाय के लोगों ने अवशेषों का भव्य स्वागत किया।''
स्थानीय लोगों ने अवशेषों के केंद्र शासित प्रदेश लाए जाने और लेह में असामान्य मौसम के संयोग को एक आध्यात्मिक संकेत बताया।
लद्दाख की पारंपरिक पोशाक पहने एक महिला ने कहा कि अवशेषों के आने के बाद से शहर में अप्रत्याशित रूप से बारिश हुई है, बादल हैं और यहां तक कि इंद्रधनुष भी देखने को मिला है।
उन्होंने कहा, ''यह विश्वास करना मुश्किल है कि लेह में बारिश हो रही है और आसमान बादलों से ढका हुआ है। हमने पहाड़ों पर इंद्रधनुष और ताजा बर्फबारी भी देखी।''
महिला ने बताया, ''लेह में बहुत कम बारिश होती है क्योंकि यहां का मौसम कठोर और शुष्क है। लेकिन जब से ये अवशेष आए हैं, ऐसा लगता है जैसे मौसम भी श्रद्धा व्यक्त कर रहा है। यही हमारी मान्यता है।''
भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरावा अवशेष 29 अप्रैल को बड़े पैमाने पर जनभागीदारी और आध्यात्मिक उत्साह के बीच लेह लाए गए, जो केंद्र शासित प्रदेश में एक ऐतिहासिक धार्मिक घटना का प्रतीक है।
लेह हवाई अड्डे पर अवशेषों का औपचारिक स्वागत किया गया और बाद में उन्हें एक भव्य जुलूस के रूप में शहर ले जाया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालु सड़कों पर कतार में खड़े होकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे।
अधिकारियों ने अगले दो हफ्तों में लद्दाख के कई स्थानों पर अवशेषों को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखने की योजना बनाई है, जिससे भक्तों और आगंतुकों को बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर के दौरान भगवान बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इससे पूर्व, लद्दाख के दो-दिवसीय दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लेह में तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों को दर्शनार्थ रखे जाने के कार्यक्रम और 2569वें बुद्ध पूर्णिमा समारोह का उद्घाटन किया।
शाह ने इस अवसर पर लद्दाख को 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद तेजी से हुए इसके विकास को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के विकास एजेंडे के केंद्र में है।
शाह ने कहा कि लद्दाख में विकास की कमी के कारण लंबे समय से केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग की जा रही थी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से सभी क्षेत्रों में स्पष्ट बदलाव आया है।
शाह ने कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचे का असर सड़क संपर्क में साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि ज़ोजिला दर्रा पहले साल में 127 दिनों तक बंद रहता था, लेकिन इस साल यह केवल 19 दिन ही बाधित रहा।
शाह ने कहा, ''कारगिल-लेह सड़क पहले लगभग 175 दिनों तक बंद रहती थी, इस साल सिर्फ 11 दिनों के लिए बंद रही।''
भाषा
धीरज नरेश
नरेश
0105 2031 लेह