न्यायिक प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी का समावेश भौगोलिक बाधा दूर और वादियों की मदद करता है: सीजेआई
सुरेश
- 01 May 2026, 07:33 PM
- Updated: 07:33 PM
गंगटोक, एक मई (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक के एकीकरण से भौगोलिक बाधाएं समाप्त होती हैं और इससे वादियों को भौगोलिक परिस्थितियों, आर्थिक समस्याओं और दूरी से जुड़ी कठिनाइयों को दूर करने में मदद मिलती है।
''प्रौद्योगिकी और न्यायिक शिक्षा'' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि भारतीय कानूनी परिदृश्य अब उस युग से आगे बढ़ चुका है जब महत्वपूर्ण अभिलेख भौतिक रूप से संग्रहित रहते थे और कागजी कार्यवाही पर निर्भरता थी तथा अब यह एक सशक्त डिजिटल व्यवस्था में बदल गया है।
उन्होंने कहा, ''जब हम देश भर में न्यायिक प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने की बात करते हैं तो वास्तव में हम भौगोलिक बाधाओं को दूर करने की बात कर रहे होते हैं, चाहे वे कठिन भूभाग, वित्तीय बाधाओं या मात्र दूरी के कारण उत्पन्न हों।"
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अदालत तक पहुंचने की यात्रा अक्सर सहनशक्ति की एक परीक्षा के रूप में मानी जाती थी।
उन्होंने कहा, "विशाल हिमालय जितना भव्य है, उतने ही यात्रा को धीमा और अनिश्चित भी बना देता है। यदि हम सिर्फ एक दशक पहले की स्थिति देखें तो सिक्किम के किसी वादी के लिए न्याय की तलाश में दूरी किलोमीटर में नहीं, बल्कि संकरे रास्तों और अनिश्चित मौसम के बीच कई दिनों की यात्रा के रूप में मापी जाती थी।"
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि डिजिटल सुधार सिद्धांत का विषय नहीं है, बल्कि कानून के शासन को बनाए रखने के लिए एक व्यावहारिक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ''हम कागजी रिकॉर्ड के युग से आगे बढ़कर एक सशक्त डिजिटल व्यवस्था में प्रवेश कर चुके हैं, जहां महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भौतिक भंडारों में पड़े रहते थे। ई-कोर्ट परियोजना ने वादी और कानून के बीच के संबंध को पूरी तरह से बदल दिया है।"
उन्होंने कहा, ''हम उस दौर से आगे बढ़ चुके हैं जहां महत्वपूर्ण अभिलेख कागजी फाइलों में बंद रहते थे और भौतिक भंडारण में पड़े रहते थे, अब हम एक सशक्त डिजिटल व्यवस्था की ओर आ गए हैं। ई-कोर्ट्स परियोजना ने वादियों और कानून के बीच के संबंध को पूरी तरह नया रूप दे दिया है।''
इस कार्यक्रम में सेशेल्स के उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रॉनी जेम्स गोविंदेन, श्रीलंका के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश मोहम्मद दिलीप नवाज और अन्य लोग उपस्थित थे।
भाषा
शुभम सुरेश
सुरेश
0105 1933 गंगटोक