लद्दाख में 2019 के बाद हुआ है तेज बदलाव: शाह
पवनेश
- 01 May 2026, 06:41 PM
- Updated: 06:41 PM
(तस्वीरों के साथ)
लेह/जम्मू, एक मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि वर्ष 2019 में पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के विभाजन के बाद से लद्दाख तीव्र परिवर्तन का एक उदाहरण बन गया है, और उन्होंने इस केंद्र शासित प्रदेश में हुए व्यापक राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक बदलावों को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के विकास एजेंडे के केंद्र में रहा है।
शाह ने कहा कि लद्दाख में विकास की कमी के कारण लंबे समय से केंद्रशासित प्रदेश के दर्जे की मांग की जा रही थी और अब इस फैसले से सभी क्षेत्रों में स्पष्ट बदलाव आया है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब 'लेह एपेक्स बॉडी' और 'कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए)' ने राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने के मुद्दे पर केंद्र के साथ बातचीत बहाल करने की फिर मांग की है।
शाह ने कहा, ''लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने की काफी समय से मांग थी। इस मांग का मूल कारण यह था कि यहां विकास नहीं हो रहा था। अब मैं आपको बताना चाहता हूं कि 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद क्या-क्या किया गया है।''
उन्होंने कहा कि लद्दाख में अब सात जिले और 193 पंचायतें हैं तथा पांच नए जिले - शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास - बनाए गए हैं एवं इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी की जा चुकी हैं।
शाह ने कहा कि स्थानीय भाषाओं को भी प्रशासनिक मान्यता दी गई है। उन्होंने कहा, ''पहले केवल हिंदी और अंग्रेजी का ही उपयोग होता था, लेकिन अब भोटी, पुरगी और उर्दू को भी महत्व दिया गया है।''
बुनियादी ढांचे के विकास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि लद्दाख में सड़कों की लंबाई 2019 से पहले लगभग 1,799 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 4,040 किलोमीटर हो गई है।
उन्होंने कहा, ''सड़क निर्माण लगभग दोगुना हो गया है।''
केंद्र सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाते हुए पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू और कश्मीर व लद्दाख - में विभाजित कर दिया था। इसी अनुच्छेद के तहत पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था।
शाह ने बताया कि लद्दाख में पुलों की संख्या 19 से बढ़कर 72 हो गई है, यानी तीन गुना वृद्धि हुई है।
अन्य क्षेत्रों में हुए विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मोबाइल टावरों की संख्या 344 से बढ़कर 653 हो गई है, जबकि हेलीपैडों की संख्या सात से बढ़कर 41 हो गई है।
उन्होंने कहा,''इस क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण बर्फ हटाने वाली मशीनों की संख्या 60 से बढ़कर 215 हो गई है।''
बिजली बुनियादी ढांचे के संबंध में शाह ने कहा कि ग्रिड से संबंधित कार्यों की संख्या 145 से बढ़कर 184 हो गई है, जबकि वितरण ट्रांसफार्मर 1,182 से बढ़कर 3,153 हो गये हैं।
मंत्री ने कहा, ''मैं इतने बड़े पैमाने पर ये आंकड़े इसलिए दे रहा हूं क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से लद्दाख नरेन्द्र मोदी सरकार और देश के प्रधानमंत्री की प्राथमिकता में रहा है। एकसाथ कई विकास कार्य हुए हैं।''
उन्होंने कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचे का असर सड़क संपर्क में साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पहले जो जोजिला दर्रा 127 दिनों तक बंद रहता था, वह इस साल सिर्फ 19 दिनों के लिए बंद रहा।
उन्होंने कहा, ''कारगिल-लेह सड़क पहले लगभग 175 दिनों तक बंद रहती थी, लेकिन इस साल वह सिर्फ 11 दिनों के लिए बंद रही।''
शाह ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना हो चुकी है, 174 आईसीटी प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, 130 स्मार्ट क्लासरूम बनाए गए हैं, 40 विज्ञान प्रयोगशालाएं निर्मित की गई हैं।
उन्होंने कहा कि लद्दाख 2024 तक पूर्णतः साक्षर प्रशासनिक इकाई बन गया और इस क्षेत्र में अब कोई भी निरक्षर व्यक्ति नहीं बचा है।
शाह ने कहा कि लद्दाख जब तत्कालीन जम्मू और कश्मीर राज्य का हिस्सा था, तब उसका बजट 1,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 6,000 करोड़ रुपये हो गया है।
उन्होंने सिंधु अवसंरचना विकास निगम के गठन की भी घोषणा की और कहा कि यह आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भाषा राजकुमार पवनेश
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0105 1841 लेह/जम्मू