न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़े मामले में कांग्रेस नेता खेड़ा को अग्रिम जमानत दी
नरेश
- 01 May 2026, 03:20 PM
- Updated: 03:20 PM
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी पर लगाए गए आरोपों से संबंधित मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी और कहा कि मामला राजनीतिक प्रतिशोध से जुड़ा प्रतीत होता है।
न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदूरकर की पीठ ने कुछ शर्तों के साथ खेड़ा को अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया। अदालत का आदेश शुक्रवार को वेबसाइट पर अपलोड किया गया। इससे पहले बृहस्पतिवार को दिन में अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
खेड़ा ने आरोप लगाया था कि शर्मा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां हैं।
अदालत ने कहा, "व्यक्तिगत आजादी एक बहुत महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है, और इससे वंचित किए जाने के लिए बहुत ठोस और मजबूत कारण होना जरूरी है, खासकर तब जब आसपास की परिस्थितियां यह दिखाती हों कि मामले में राजनीतिक पहलू छुपा हो सकता है।"
अदालत ने कहा कि यदि अपराध शाखा थाने में दर्ज मामले में अपीलकर्ता (खेड़ा) की गिरफ्तारी हुई है तो उन्हें अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।
अदालत ने कहा कि रिहाई जांच अधिकारी द्वारा उचित समझी गई शर्तों और नियमों पर आधारित होगी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि उसका मानना है कि अग्रिम जमानत की अर्जी पर फैसला करते समय निष्पक्ष जांच और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाना जरूरी होता है।
पीठ ने खेड़ा को जांच में सहयोग करने और जरूरत होने पर थाने में उपस्थित होने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने कहा कि वह जांच या मुकदमे के दौरान किसी भी सबूत को प्रभावित या उससे छेड़छाड़ न करें।
अदालत ने कहा कि खेड़ा बिना संबंधित अदालत की अनुमति के विदेश नहीं जा सकते और यदि अधीनस्थ अदालत आवश्यक समझे, तो वह अतिरिक्त शर्तें भी लगा सकती है।
पीठ ने कहा, "इस मामले में आपराधिक प्रक्रिया को निष्पक्षता और सावधानी के साथ लागू किया जाना चाहिए, ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरा न हो। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि कई बार मामले राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रभावित हो सकते हैं। इस मामले में लगाए गए आरोप और जवाबी आरोप, पहली नजर में, राजनीतिक रूप से प्रेरित लगते हैं। ऐसा लगता है कि ये आरोप राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से प्रभावित हैं, न कि ऐसी स्थिति को दिखाते हैं जिसमें हिरासत में पूछताछ जरूरी हो। इन आरोपों की सच्चाई मुकदमे के दौरान पता लगाई जा सकती है।"
पीठ ने कहा कि उसका मानना है कि इस मामले में खेड़ा तथा शिकायतकर्ता के पति (असम के मुख्यमंत्री) दोनों ने आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं।
अदालत ने कहा, "फिलहाल, हम इस बात को समझते हैं कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता है। इसे मामूली समझकर खतरे में नहीं डाला जा सकता। लेकिन साथ ही हमारा यह भी मानना है कि प्राथमिकी में उल्लेखित किसी भी अपराध की जांच पूरी ईमानदारी से होनी चाहिए। जांच पूरी तेजी और मजबूती के साथ होनी चाहिए। इसमें अपीलकर्ता का सहयोग भी होना चाहिए।"
गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 24 अप्रैल के आदेश के खिलाफ खेड़ा की अपील को स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा, "हमारी राय में उच्च न्यायालय के आदेश में की गई टिप्पणियां सभी उपलब्ध रिकॉर्ड को देखकर सही तरीके से नहीं की गई हैं। ये टिप्पणिया गलत समझ पर आधारित लगती हैं। इनमें खासकर दोष साबित करने का बोझ आरोपी पर डाल दिया गया है, जो सही नहीं है।"
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्राथमिकी में जिस घटना के संबंध में आरोप लगाया गया है, वह असम विधानसभा चुनाव का प्रचार खत्म होने से पहले छह अप्रैल 2026 को हुई थी।
अदालत ने घटना के बारे में कहा, "अपीलकर्ता एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन किया और शिकायतकर्ता व मुख्यमंत्री की पत्नी पर कुछ आरोप लगाए। इस दौरान उन्होंने तीन पासपोर्ट दिखाए और कहा कि शिकायतकर्ता के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं। इनमें से दो मुस्लिम देशों के हैं। लेकिन शिकायतकर्ता के पति की राजनीति मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत पर आधारित है।"
अदालत ने कहा कि जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने पाया है कि जो पासपोर्ट शिकायतकर्ता के बताए जा रहे थे, वे असली नहीं, नकली हैं और खेड़ा ने मुख्यमंत्री की पत्नी को बदनाम करने, उनकी प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के इरादे से ये पासपोर्ट दिखाए थे और इसी उद्देश्य से संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया था।
अदालत ने कहा कि यह सही है कि जो दस्तावेज खेड़ा ने दिखाए हैं, वे अभियोजन पक्ष के पास हैं और अभियोजन ने उनकी प्रारंभिक जांच भी की है।
अदालत ने कहा, "लेकिन प्रारंभिक स्तर पर ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने (खेड़ा) ऐसा सिर्फ अपनी पार्टी को राजनीतिक लाभ दिलाने के लिए किया था। हालांकि, हम इस बात को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते कि राज्य के मुख्यमंत्री व शिकायतकर्ता के पति ने कई प्रेस बयानों में (खेड़ा) के खिलाफ कुछ अनुचित टिप्पणियां की हैं। इन बयानों का विवरण अदालत में पेश किया गया है।"
मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा ने खुद पर आरोप लगने के बाद खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया था।
इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने खेड़ा को सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस ने इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
इसके बाद शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश पारित कर ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी थी और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने के लिए कहा था।
भाषा जोहेब नरेश
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