तृणमूल सांसदों ने केंद्रीय बलों पर मतदान केंद्र के बाहर नागरिकों पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया
मनीषा
- 29 Apr 2026, 05:24 PM
- Updated: 05:24 PM
कोलकाता, 29 अप्रैल (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने बुधवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले में एक मतदान केंद्र के पास केंद्रीय सुरक्षा बलों ने महिलाओं और एक बच्चे सहित नागरिकों पर लाठीचार्ज किया।
घोष ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सुरक्षा बलों पर "अविश्वसनीय हिंसा" का आरोप लगाया और दावा किया कि महिलाओं पर लाठीचार्ज करने के बाद भी अर्धसैनिक बल के जवान नहीं रुके और उन्होंने ''एक बच्चे को घायल कर दिया।''
घोष ने कहा, "यह अस्वीकार्य है। दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाना चाहिए।"
उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका की भी आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं उनकी आंखों के सामने हो रही हैं।
हालांकि घोष ने निर्वाचन क्षेत्र का नाम नहीं लिया।
निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयास के आरोपों के बाद सुरक्षा बलों ने फाल्टा के बेलसिंह इलाके में एक बूथ के बाहर एक समूह पर लाठीचार्ज किया, जिसमें पुरुष और महिलाएं शामिल थीं।
अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा बलों ने बार-बार लोगों से वहां से जाने की अपील की जिसके बेअसर होने के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई की गई और घटना के संबंध में दो लोगों को हिरासत में लिया गया।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने बिना किसी उकसावे के लाठीचार्ज किया, जिससे बूथ नंबर 186 के बाहर कतार में खड़ी कई महिला मतदाता घायल हो गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अपनी मां के साथ आए एक बच्चे को सिर में चोटें आईं।
यह घटना निर्वाचन क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियों के बीच हुई है, जहां निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान सुनिश्चित करने के लिए विशेष पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा को तैनात किया गया है।
निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट मांगी गई है और अगर बच्चे को चोट पाई जाती है और किसी सुरक्षाकर्मी की संलिप्तता साबित होती है, तो कार्रवाई की जाएगी।
इसी घटना पर परोक्ष टिप्पणी करते हुए, तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सदस्य महुआ मोइत्रा ने सुरक्षा बलों को "अमित शाह की कसाइयों की सेना" बताया, जो मतदान के दिन आम लोगों पर अत्याचार करते हुए एक निर्दोष बच्चे को भी चोट पहुंचाने से नहीं रुकती।
भाषा अमित मनीषा
मनीषा
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