लैंसडौन का नाम बदलने के प्रस्ताव का भाजपा विधायक ने किया विरोध, रक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
दीप्ति सं रवि कांत
- 25 Apr 2026, 04:53 PM
- Updated: 04:53 PM
देहरादून/कोटद्वार, 25 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड के पौड़ी जिले में स्थित लैंसडौन नगर का नाम बदलने के प्रस्ताव का भाजपा विधायक दिलीप रावत ने विरोध किया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता भी इस नाम के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं चाहती है।
लैंसडौन विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के विधायक रावत ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर नाम बदलने की प्रक्रिया को "खेदजनक" बताया। रावत ने कहा कि लैंसडौन एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिलता है।
रावत ने कहा, "यदि इस पर्यटन नगरी का नाम बदल दिया जाता है, तो इसकी बढ़ती पहचान और पर्यटन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जो राज्य के हित में नहीं होगा।"
उन्होंने रक्षा मंत्री से इस प्रक्रिया को रोकने का आग्रह करते हुए कहा कि क्षेत्र की जनता लैंसडौन के नाम के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं चाहती है।
लैंसडौन छावनी परिषद द्वारा हाल ही में जारी एक सार्वजनिक नोटिस में नगर का नाम बदलकर 'जसवंतगढ़' करने के प्रस्ताव पर आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं, जिसके बाद विधायक का यह विरोध सामने आया है।
छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी हर्षित राज सिंह ने बताया कि केंद्र के निर्देश पर यह प्रस्ताव भेजा गया था और अब इस पर जनता की राय ली जा रही है। इसके लिए नोटिस जारी किए गए हैं और समाचार पत्रों में विज्ञापन भी प्रकाशित किए गए हैं।
नोटिस के अनुसार, छावनी बोर्ड ने 10 अप्रैल को अपनी बैठक में नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर विचार किया था। अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा, लेकिन इससे पहले जनता और अन्य हितधारकों से सुझाव तथा आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। इसके लिए एक माह का समय दिया गया है।
करीब ढाई साल पहले भी रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर लैंसडौन सैन्य छावनी बोर्ड ने ब्रिटिश काल में रखे गए इस नाम को बदलकर 1962 के भारत-चीन युद्ध के नायक एवं महावीर चक्र विजेता शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह के नाम पर 'जसवंतगढ़' करने का प्रस्ताव पारित कर भेजा था।
उस प्रस्ताव में हालांकि यह भी उल्लेख किया गया था कि आम जनता नाम परिवर्तन के पक्ष में नहीं है, लेकिन यदि नाम बदला जाए तो 'जसवंतगढ़' नाम उपयुक्त होगा।
ब्रिटिश काल में लगभग 132 वर्ष पहले इस नगर का नाम तत्कालीन वायसराय के नाम पर लैंसडौन रखा गया था। इससे पहले इसे 'कालौं का डांडा' (काले बादलों से घिरा पहाड़) कहा जाता था।
उत्तराखंड में स्थानों के नाम बदलने को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं। पिछले वर्ष राज्य सरकार ने 'भारतीय संस्कृति व विरासत और जनभावनाओं' के अनुरूप हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उधमसिंह नगर जिलों में 15 स्थानों के नाम बदले थे।
देहरादून के मियांवाला क्षेत्र का नाम बदलने के फैसले का स्थानीय लोगों ने विरोध किया था, जिसके बाद सरकार को वह निर्णय वापस लेना पड़ा था। लोगों का तर्क था कि राजपूतों के एक वर्ग को एक पदवी के तौर पर 'मियां' उपाधि दी गयी थी और उसका किसी धर्म विशेष से कोई संबंध नहीं है।
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दीप्ति सं रवि कांत
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