'आप' को लगा बड़ा झटका, चड्ढा समेत सात राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ी
जोहेब
- 24 Apr 2026, 10:06 PM
- Updated: 10:06 PM
नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक समेत पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ दी।
चड्ढा ने कहा कि वे सभी भाजपा में शामिल हो गए हैं।
उन्होंने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से भटक गई है।
सात सांसदों के समूह में हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी शामिल हैं।
इन सांसदों के इस्तीफे की जानकारी मध्य दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जल्दबाजी में बुलाई गई प्रेसवार्ता में दी गई, जिसके कारण कई लोग आश्चर्यचकित रह गए।
इसके बाद 'आप' के प्रमुख केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात किया है, जबकि राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले सातों सांसदों को ''गद्दार'' करार दिया।
भाजपा ने सांसदों का गर्मजोशी से स्वागत किया और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें मिठाई खिलाई।
नवीन ने इसके तुरंत बाद 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज पार्टी मुख्यालय में राघव चड्ढा जी, संदीप पाठक जी और अशोक मित्तल जी का भाजपा परिवार में स्वागत किया। साथ ही, हरभजन सिंह जी, स्वाति मालीवाल जी, विक्रम साहनी जी और राजेंद्र गुप्ता जी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर काम करने के लिए शुभकामनाएं।''
'आप' नेताओं ने भाजपा पर पार्टी सांसदों को तोड़ने के लिए ''ऑपरेशन लोटस'' शुरू करने और पंजाब में मान सरकार के अच्छे कार्यों को रोकने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
चड्ढा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सात सांसद भाजपा में सम्मिलित हो गए हैं क्योंकि 'आप' अब अपने संस्थापक सिद्धांतों का सम्मान नहीं कर रही।
उन्होंने कहा, " जिस आम आदमी पार्टी को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा, अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अपने सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से पूरी तरह भटक गई है।''
हाल ही में चड्ढा को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया और उनकी जगह मित्तल को नियुक्त किया गया था।
उन्होंने पार्टी के 10 सांसदों का संदर्भ देते हुए कहा, ''संविधान के अनुसार, किसी पार्टी के कुल सांसदों में से दो-तिहाई सांसद दूसरी पार्टी में सम्मिलित हो सकते हैं।''
चड्ढा ने कहा, ''उन्होंने (सांसदों) पहले ही हस्ताक्षर कर दिए थे, और आज सुबह हमने राज्यसभा के सभापति को हस्ताक्षरित पत्रों और अन्य औपचारिक दस्तावेजों समेत सभी आवश्यक दस्तावेज सौंप दिए।''
आप के राष्ट्रीय महासचिव रहे पाठक ने भी कहा कि पार्टी उन सिद्धांतों से भटक गई है जिनपर इसकी स्थापना हुई थी।
सात सांसदों में से चड्ढा, पाठक, मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और हरभजन सिंह समेत छह सांसद पंजाब जबकि स्वाति मालीवाल दिल्ली से हैं।
आप के जिन तीन राज्यसभा सदस्यों ने अब भी पार्टी से अपना संबंध बनाए रखा है, उनमें संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल शामिल हैं।
आप सूत्रों ने कहा कि संबंधित सांसदों ने यह कदम अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को अस्थिर करने के उद्देश्य से उठाया है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के डर ने संभवत: पंजाब के कुछ कारोबारी सांसदों के फैसले को प्रभावित करने में भूमिका निभाई, जबकि अन्य सांसद पार्टी में अपनी घटती राजनीतिक भूमिका से नाखुश थे।
ईडी ने 15 अप्रैल को, विदेशी अंशदान अधिनियम (फेमा) मामले की जांच के तहत, पंजाब में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल से जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की थी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महासचिव रहे पाठक खुद को दरकिनार महसूस कर रहे थे क्योंकि उनकी भूमिका पार्टी के दिन-प्रतिदिन के मामलों तक ही सीमित थी।
सूत्रों के अनुसार, पंजाब, गोवा और गुजरात - जहां विधानसभा चुनाव होना है, वहां पाठक चुनाव की तैयारियों में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे। इसके बजाय, आतिशी (गोवा), गोपाल राय और दुर्गेश पाठक (गुजरात), तथा मनीष सिसोदिया (पंजाब) जैसे अन्य वरिष्ठ नेता केजरीवाल के साथ मिलकर चुनाव की तैयारियों का नेतृत्व कर रहे थे।
वर्ष 2024 में आबकारी नीति मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद, चड्ढा से उनके प्रमुख दायित्व छीन लिए गए थे। सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब पिछले महीने उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया।
मालीवाल ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने कदाचार में शामिल व्यक्तियों को संरक्षण दिया।
मालीवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने 2006 में राष्ट्रीय और सार्वजनिक सेवा का मार्ग चुना था, लेकिन अंततः पार्टी से निराश हो गईं।
मालीवाल ने कहा, ''आरटीआई आंदोलन और अन्ना आंदोलन से लेकर आम आदमी पार्टी के गठन तथा दिल्ली महिला आयोग में मेरी आठ साल की समर्पित सेवा तक, मैंने हर स्तर पर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ योगदान दिया।''
उन्होंने कहा, ''आज मुझे बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि जिन सिद्धांतों, मूल्यों और ईमानदार राजनीति के संकल्प के साथ हमने यह यात्रा शुरू की थी, उन्हें अरविंद केजरीवाल जी और उनके इशारे पर पूरी आम आदमी पार्टी ने त्याग दिया है।''
आप नेता संजय सिंह ने बागी सांसदों की कड़ी आलोचना करते हुए संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पंजाब की जनता उनके ''विश्वासघात'' को कभी माफ नहीं करेगी।
सिंह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह राज्यसभा के सभापति को पत्र सौंपेंगे, जिसमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को भाजपा में शामिल होने की वजह से अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी, क्योंकि उनका यह कदम संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत स्वेच्छा से अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है।
इस बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि भाजपा आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है और उसने ''पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात किया है''।
मान ने राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए नीदरलैंड और फिनलैंड की एक सप्ताह लंबी यात्रा से लौटने के बाद कहा, ''जब उन्हें भगवंत मान के खिलाफ कुछ नहीं मिला, तो उन्होंने आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की।''
भाजपा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ''पूरी तरह से अस्त-व्यस्त'' है और ''भ्रष्टाचार का अड्डा'' बन गई है।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''भ्रष्ट आम आदमी पार्टी पर कोई विश्वास नहीं करता। जिस पार्टी ने खुद को एक अलग तरह की पार्टी बताकर शुरुआत की थी, वह अब भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है।''
पार्टी के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने 'एक्स' पर कहा, ''आम आदमी पार्टी पूरी तरह से बिखरी हुई है। इसका पतन अब अटकलबाजी नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से घटित हो रहा है।''
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जोहेब
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