उच्चतम न्यायालय ने ईवीएम के इस्तेमाल से जुड़ी दो याचिकाएं खारिज की
संतोष पवनेश
- 15 Mar 2024, 09:31 PM
- Updated: 09:31 PM
नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की कार्य प्रणाली में अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और कहा कि हर तरीके के सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष होते हैं।
शीर्ष अदालत ने एक अन्य याचिका भी खारिज कर दी जिसमें दावा किया गया था कि 2016-19 के दौरान चुनाव आयोग की अभिरक्षा से ‘गायब’ 19 लाख ईवीएम का इस्तेमाल आगामी लोकसभा चुनाव के परिणामों में हेरफेर करने के लिए किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की एक पीठ ने कहा कि यह अदालत कई याचिकाओं की पहले ही कई मौकों पर पड़ताल कर चुकी है और ईवीएम के कामकाज से संबंधित विभिन्न मुद्दों से निपट चुकी है।
पीठ ने याचिकाकर्ता नंदिनी शर्मा से कहा, "हम कितनी याचिकाओं पर विचार करेंगे? हाल ही में, हमने ‘वोटर वेरीफिएबल पेपर ऑडिट ट्रॉयल’ (वीवीपीएटी) से संबंधित एक याचिका पर विचार किया था। हम धारणाओं का अनुसरण नहीं कर सकते। हर पद्धति के अपने सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष होते हैं। माफ करें, हम अनुच्छेद 32 के तहत इस पर विचार नहीं कर सकते।’’
अनुच्छेद 32 भारतीय नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
पीठ ने आदेश में कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे की शीर्ष अदालत ने विभिन्न याचिकाओं में पड़ताल की है।
न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि अदालत ने इस मुद्दे पर 10 से अधिक मामलों की पड़ताल की है।
शर्मा ने अपनी याचिका में भारत निर्वाचन आयोग और छह राजनीतिक दलों को पक्षकार बनाया था और आगामी लोकसभा चुनाव में ईवीएम की जगह मतपत्रों के इस्तेमाल का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
इस बीच न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इंडियन न्यू कांग्रेस पार्टी (आईएनसीपी) द्वारा दायर एक अन्य याचिका को खारिज कर दिया।
आईएनसीपी की अलग याचिका में दावा किया गया कि चुनाव आयोग की अभिरक्षा से ‘गायब’ 19 लाख ईवीएम का इस्तेमाल आगामी लोकसभा चुनाव के परिणामों में हेरफेर करने के लिए किया जा सकता है।
पीठ में न्यायमूर्ति गवई के अलावा न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे। अदालत ने आईएनसीपी की आशंका को पूरी तरह से निराधार बताया और याचिका खारिज कर दी।
भाषा संतोष