हिल काका के नायक ताहिर फजल का 62 साल की उम्र में निधन
माधव
- 24 Apr 2026, 06:01 PM
- Updated: 06:01 PM
पुंछ, 24 अप्रैल (भाषा) जम्मू कश्मीर के पूंछ-राजौरी सेक्टर के एक गांव में बृहस्पतिवार को 62 वर्षीय ताहिर फजल का अंतिम संस्कार किया गया तथा उन्हें एक विशिष्ट और बहादुर व्यक्ति के रूप में याद किया गया।
'बहादुर-ए-हिल काका' के नाम से मशहूर ताहिर फजल एक असाधारण व्यक्ति थे। दो दशक पहले, उन्होंने अपनी पैतृक पहाड़ी 'काका' को पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादियों से छुड़ाने के लिए अपने कबीले को एकजुट किया था। करगिल युद्ध के बाद यह पहाड़ी आतंकवादियों का गढ़ बन चुकी थी।
फजल की संक्षिप्त बीमारी के बाद बृहस्पतिवार को निधन हुआ।
भारतीय सेना ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए 'बहादुर भूमि पुत्र' बताया। उन्होंने 'ऑपरेशन सर्प विनाश' के दौरान 'हिल काका' में आतंकवादियों के संचालन केंद्र को सफलतापूर्वक ध्वस्त करने में सेना की कंधे से कंधा मिलाकर मदद की थी।
दूरदराज वाले क्षेत्र 'मड्डा-पहाड़ी काका' निवासी फजल सऊदी अरब से लौटे थे क्योंकि उनके भाई को आतंकवादियों ने मार डाला था। उन्होंने स्वदेश लौटने के बाद आतंकवादियों से लड़ने की कसम खाई।
एक परिजन ने बताया कि फजल ने अपने भाई की हत्या के लिए जिम्मेदार उग्रवादी कासिद को एक महीने बाद मार गिराया था। उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि अपने निधन के समय तक फजल अपने पास वह एके-47 रखते थे जो उन्होंने मारे गये पाकिस्तानी आतंकवादी से जब्त की थी।
नियंत्रण रेखा के पास पीर पंजाल पर्वतमाला में स्थित हिल काका 1990 के दशक के अंत और 2000 के शुरुआती वर्षों के बीच आतंकवादियों की गतिविधियों और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बन गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थान एक प्रकार से आतंकवादियों के नियत्रंण में था और निवासियों को उनके आदेशों का पालन करना पड़ता था।
उन्होंने कहा, ''हिल काका प्रशिक्षण एवं पारगमन का केंद्र बन गया था और यहां उमर मूसा जैसे आतंकी कमांडर प्रशिक्षण शिविर चलाते थे। यह क्षेत्र पाक अधिकृत कश्मीर से महज 3.5 किमी दूर था और दुर्गम इलाका होने के कारण यह स्थल सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण था। ''
स्थानीय लोगों के अनुसार, आतंकवादियों का इस क्षेत्र में इतना दबदबा था कि वे सेना के हेलीकॉप्टरों को क्षेत्र में उतरने भी नहीं देते थे। परंतु 10 जून 2002 को एक स्थानीय निवासी की हत्या ने लोगों को प्रतिरोध के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि फजल ने आतंकवादियों के खिलाफ प्रतिरोध के लिए स्थानीय युवाओं को एकजुट किया और 'पीर पंजाल स्काउट्स' नामक समूह बनाया। फजल ने शुरू में इस काम के लिए अपने स्तर पर धन का प्रबंध किया। बाद में सेना और पुलिस के समन्वय से 'ऑपरेशन सर्प विनाश' चलाया गया जो 2003 में समाप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि इसे आतंकवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण अभियान के रूप में माना जाता है, जिसमें आतंकवादियों को भगाने के लिए स्थानीय लोग, सेना और पुलिस के साथ मिलकर लड़े। इस अभियान में कई नागरिक, पुलिसकर्मी और सेना के जवान शहीद हुए।
हिल काका को आतंकवादियों से मुक्त कराने के लिए फजल ने तत्कालीन केंद्र सरकार को राजी करवाने के मकसद से वरिष्ठ सेना अधिकारियों तथा तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की थी।
सेना की 'व्हाइट नाइट कोर' ने फजल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्हें बहादुर बताया। इसने कहा, ''उनकी साहसपूर्ण भावना, दृढ निडरता तथा भारतीय सेना के साथ उनके मजबूत संबंध उनके असाधारण व्यक्तित्व का प्रमाण है। उनका अमिट साहस हमारे दिलों में हमेशा अंकित रहेगा''।
फजल के अंतिम संस्कार में शामिल हुए सेना के एक अधिकारी ने कहा कि फजल ने क्षेत्र में शांति बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अधिकारी के मुताबिक, ''उन्होंने पूरे साहस के साथ सेना का समर्थन किया और बाद में पुलिस तथा 'विशेष अभियान समूह (एसओजी)' के साथ कई अभियानों में काम किया। समाज के प्रति उनका यह योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के कैबिनेट मंत्री जावेद अहमद राना ने भी उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया तथा ऑपरेशन सर्प विनाश के दौरान उनके साहस के लिए उन्हे 'गुमनाम योद्धा' कहा।
मंत्री के मुताबिक, स्काउट्स का नेतृत्व और उनकी देशभक्ति ने हिल काका में शांति बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फजल की मौत पर पीर पंजाल क्षेत्र में उन्हे व्यापक तौर पर श्रद्धांजलि दी गयी।
भाषा माधव
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