बेमेल रंग और टाइपिंग त्रुटियों से अधिकारियों ने नकली मौंजारो के इंजेक्शन का पता लगाया
वैभव
- 23 Apr 2026, 04:43 PM
- Updated: 04:43 PM
गुरुग्राम, 23 अप्रैल (भाषा) रंग में असमानता से लेकर टाइपिंग से संबंधित त्रुटियों तक... नकली मौंजारो इंजेक्शन की पैकेजिंग में स्पष्ट अंतरों ने औषधि नियंत्रण कार्यालय का ध्यान खींचा और इसी के कारण गुरुग्राम के एक फ्लैट से मधुमेह और वजन घटाने वाली इस दवा की अवैध बिक्री एवं उत्पादन पर कार्रवाई हो पाई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
औषधि नियंत्रण अधिकारी अमनदीप चौहान ने बताया कि कथित सरगना अवि शर्मा ने लोकप्रिय ई-कॉमर्स वेबसाइट अलीबाबा के माध्यम से चीन से कच्चा माल प्राप्त किया था।
अधिकारियों ने 18 अप्रैल को डीएलएफ फेज चार में एक वाहन पर छापा मारा और 70 लाख रुपये मूल्य के नकली मौंजारो (टिरजेपाटाइड) इंजेक्शन जब्त किए।
जांच का विवरण देते हुए चौहान ने कहा कि टीम ने नकली नमूने की तुलना असली नमूने से की और पाया कि नकली इंजेक्शन के डिब्बों में नीले और लाल रंग के अलग-अलग शेड थे।
उन्होंने यह भी कहा कि मूल संस्करण की तुलना में नकली संस्करणों में स्पष्ट रूप से टाइपिंग की त्रुटियां थीं।
चौहान ने कहा, ''दोनों बॉक्स पर इंजेक्शन पेन का चित्र बना हुआ है लेकिन असली इंजेक्शन पर यह स्पष्ट और चमकीला नजर आता है, जबकि नकली वाले पर यह धुंधला, गहरा और छोटा है।'' उन्होंने कहा कि वे जब्त किए गए नमूनों के प्रयोगशाला परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
आगे की जांच के दौरान टीम ने गुरुग्राम के सेक्टर 62 स्थित एक फ्लैट पर छापा मारा जहां कथित तौर पर औषधि के कच्चे माल में पानी मिलाकर इंजेक्शन तैयार किए जाते थे।
पुलिस ने सबसे पहले डीएलएफ फेज चार से डिलीवरीमैन मुज्जमिल को गिरफ्तार किया। बाद में अवि शर्मा को भी हिरासत में ले लिया गया।
एक अधिकारी ने बताया कि 32 वर्षीय शर्मा ने नकली अधिक पैसा कमाने के लिए नकली इंजेक्शनों का उत्पादन शुरू किया। पिछले व्यवसाय से उसकी ठीक-ठाक कमाई नहीं हो पा रही थी।
अपना फर्जी कारोबार शुरू करने से पहले शर्मा ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2016 तक कुछ समय के लिए अपने पिता की कंपनी में काम किया था।
इसके कुछ समय बाद ही उसने हेम्प्ड सोल्स इंटरनेशनल एलएलपी नामक अपनी खुद की आयुर्वेदिक कंपनी की स्थापना की, जो प्राकृतिक तेलों की बिक्री करती है।
अधिकारी ने कहा, ''अवि शर्मा अपनी आय को कम से कम दो करोड़ रुपये प्रति माह तक बढ़ाना चाहता था। पैसे के लालच में उसने नकली मौंजारो इंजेक्शन का अवैध उत्पादन शुरू किया।''
मौंजारो की निर्माता अमेरिकी दवा कंपनी एली लिली ने इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
भारत में एली लिली एंड कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, ''हमें हाल में संदिग्ध और नकली उत्पादों की जब्ती से संबंधित एक घटनाक्रम की जानकारी मिली है, जिन पर कथित तौर पर हमारे उत्पाद ब्रांड नाम मौंजारो (टिरजेपाटाइड) का इस्तेमाल किया गया है... लिली मरीज की सुरक्षा को अत्यंत गंभीरता से लेती है और अवैध दवाओं के खिलाफ नियामक प्राधिकरण की कार्रवाई का स्वागत करती है।''
एली लिली ने 2025 में भारत में मौंजारो (टिरजेपाटाइड) लॉन्च किया, जिसका मुख्य उद्देश्य टाइप दो मधुमेह और मोटापे का इलाज करना था।
इसके कुछ महीने बाद ही यह इंजेक्शन लोकप्रिय हो गया और भारत में मूल्य के हिसाब से यह सबसे अधिक बिकने वाली दवा बन गया।
भाषा सुरभि वैभव
वैभव
2304 1643 गुरुग्राम