ओडिशा लोकभवन में आईआरएस अधिकारियों के साथ हुए अनुचित बर्ताव की जांच के लिए समिति गठित: अधिकारी
दिलीप
- 17 Apr 2026, 10:41 PM
- Updated: 10:41 PM
भुवनेश्वर, 17अप्रैल (भाषा) एक दिन पहले यहां भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के दो अधिकारियों के साथ 'अनुचित' व्यवहार के बाद ओडिशा के लोक भवन से निकाल दिये जाने के आरोपों की जांच के लिए शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया।
वर्ष 2015 और वर्ष 2023 बैच के ये दोनों अधिकारी बृहस्पतिवार को प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (पीसीसीआईटी) डॉ. डी. सुधाकर राव के साथ लोक भवन गए थे।
राव ने लोक भवन में राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति के साथ शिष्टाचार मुलाकात की, जबकि दो आईआरएस अधिकारी बाहर इंतजार कर रहे थे। राव ने 13 अप्रैल को पदभार ग्रहण किया।
हालांकि, आरोप के अनुसार, कर्मचारियों और एडीसी (पुलिस), द्वारा आईआरएस अधिकारियों के साथ 'अनुचित व्यवहार' किया गया, उन्हें जबरन लोक भवन परिसर से एक पुलिस वाहन से कैपिटल पुलिस थाने ले जाया गया। एडीसी (पुलिस) 2021 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।
पुलिस सूत्रों ने कहा कि दोनों आईआरएस अधिकारियों पर नशे में होने का आरोप लगाया, लेकिन जांच में यह झूठ निकला।
राव ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पत्र लिखकर इस मामले को राज्यपाल के आयुक्त-सह-सचिव के संज्ञान में लाया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "लोक भवन को शुक्रवार को पत्र प्राप्त हुआ। हमने आरोपों की जांच के लिए चार सदस्यीय वरिष्ठ अधिकारियों की समिति का गठन किया है। समिति को मंगलवार तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिसके बाद मामला राज्यपाल के समक्ष रखा जाएगा।''
जांच के दौरान समिति दोनों पक्षों से बात करेगी।
लोक भवन को लिखे अपने पत्र में राव ने कहा, "यह बेहद आपत्तिजनक है कि इन अधिकारियों को, जो आधिकारिक ड्यूटी पर थे और मेरे सीधे निर्देशों के तहत काम कर रहे थे, अनधिकृत रूप से प्रवेश करने वाले लोगों की तरह माना गया… । इसके अलावा, उनके नशे की हालत में होने के संबंध में झूठे आरोप लगाए गए, जो बाद में थाने में निराधार साबित हुए।"
राव ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के विरूद्ध इस तरह का 'मनमानापन' उनके पद की गरिमा का अपमान है। उन्होंने राज्यपाल सचिवालय से संबंधित सुरक्षाकर्मियों और एडीसी (पुलिस) के आचरण की जांच करने का आग्रह किया, ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।
इस बीच, पुलिस सूत्रों ने बताया कि दोनों आईआरएस अधिकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया, हालांकि उन्हें कैपिटल पुलिस स्टेशन लाया गया था।
भाषा
राजकुमार दिलीप
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