विपक्ष ने संविधान पर आक्रमण नाकाम किया, 2023 का महिला आरक्षण कानून लागू हो: कांग्रेस
प्रशांत
- 17 Apr 2026, 09:23 PM
- Updated: 09:23 PM
नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को दावा किया कि विपक्ष ने परिसीमन प्रस्ताव को महिला आरक्षण से जोड़ने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के 'कुटिल प्रयास' और संविधान पर आक्रमण को विफल कर दिया।
पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिला आरक्षण लागू करना चाहते हैं तो 2023 में पारित कानून को लागू करें जिसमें विपक्ष पूरा सहयोग देगा।
उन्होंने संसद परिसर में कहा, ''यह महिला (आरक्षण) विधेयक नहीं था, ये हिंदुस्तान के राजनीतिक और चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश थी, संविधान पर आक्रमण था। हमने इसे रोक दिया।''
राहुल गांधी ने यह भी कहा, ''मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं, अगर आप महिला आरक्षण विधेयक लाना चाहते हैं, तो 2023 का महिला आरक्षण विधेयक आज से लागू कर दीजिए, पूरा विपक्ष आपको 100 प्रतिशत समर्थन देगा। अगर ऐसा किया गया, तो हम महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू करवा देंगे।''
बाद में उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया। भारत ने देख लिया। 'इंडिया' गठबंधन ने रोक दिया। जय संविधान।''
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर परिसीमन करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और संघवाद को चोट पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया। उनकी ये चालबाज़ी एकजुट विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन ने भांप ली और संविधान संशोधन विधेयक गिर गया।''
उन्होंने कहा, ''हम सभी विपक्षी दलों के नेताओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।''
खरगे ने दावा किया, ''मोदी-शाह अपनी राजनीति को चमकाने के लिए भारत के लोकतंत्र को तबाह करने चले थे, उनकी ये साज़िश अब औंधे मुंह गिर गई है।''
उन्होंने कहा, ''हम मोदी सरकार से फिर एक बार मांग करते हैं कि 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अनुसार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के चुनावों से ही दिया जाए। कांग्रेस पार्टी सितंबर 2023 से इसकी मांग कर रही है। यह 'नारी शक्ति' के प्रति प्रधानमंत्री जी की प्रतिबद्धता की असली परीक्षा होगी।''
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि यह संघवाद और संविधान की जीत है।
रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा महिलाओं के आरक्षण (जिस पर पहले ही निर्णय हो चुका था) को अपने खतरनाक परिसीमन प्रस्तावों से जोड़ने का कुटिल और चालाकी भरा प्रयास लोकसभा में निर्णायक रूप से पराजित हो गया है।''
उनका कहना था, ''यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था, हमारे संघीय ढांचे और संविधान की जीत है। यह नॉन-बायलॉजिकल, नॉन-गृहस्थ प्रधानमंत्री की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।''
रमेश ने कहा कि मोदी सरकार के लिए आगे का रास्ता स्पष्ट है कि उसे 2029 के चुनाव के लिए लोकसभा की मौजूदा व्यवस्था में ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा, ''सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के बाद से ही पूरे विपक्ष की लगातार मांग रही है, जिसे अंततः कल देर रात अधिसूचित किया गया।''
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया।
सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
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