वेदांता संयंत्र धमाका: मृतक संख्या बढ़कर 21 हुई, कांग्रेस की गैर-इरादतन हत्या की धारा जोड़ने की मांग
जितेंद्र
- 17 Apr 2026, 08:58 PM
- Updated: 08:58 PM
रायपुर, 17 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता विद्युत संयंत्र में हुए विस्फोट में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 21 हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में घायल 14 श्रमिकों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है, जिनमें से पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है।
सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि मध्यप्रदेश के सिंगरौली निवासी मजदूर किस्मत अली की बृहस्पतिवार रात रायपुर के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 21 हो गयी।
सिंघीतराई गांव स्थित वेदांता लिमिटेड के विद्युत संयंत्र में 14 अप्रैल को धमाका हुआ था।
धमाका एक स्टील ट्यूब में हुआ, जो बॉयलर से टर्बाइन तक उच्च दाब वाली भाप ले जा रही थी, जिससे कई मजदूर बुरी तरह झुलस गए थे।
इस घटना में चार मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि नौ अन्य ने बाद में दम तोड़ दिया।
अस्पताल में इलाज के दौरान 15 अप्रैल को सात अन्य मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में पश्चिम बंगाल के छह, छत्तीसगढ़ के पांच, झारखंड और उत्तर प्रदेश के तीन-तीन, और बिहार तथा मध्य प्रदेश के दो-दो मजदूर शामिल हैं।
घायलों का इलाज रायगढ़ के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है और इनमें से पांच की हालत गंभीर है।
पुलिस ने लापरवाही से मौत और मशीनों के संचालन में लापरवाही बरतने के आरोप में मामला दर्ज किया है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वेदांता कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल, कंपनी प्रबंधक देवेन्द्र पटेल सहित 10 जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान अन्य दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वेदांता कंपनी के बायलर मुख्य निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक तकनीकी रिपोर्ट में बताया गया कि बायलर फर्नेस के भीतर अत्यधिक ईंधन के जमा हो जाने के कारण तेज दबाव उत्पन्न हुआ, जिससे बायलर में विस्फोट हुआ।
यह रिपोर्ट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) द्वारा भी पुष्टि की गई है। कांग्रेस नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या की धारा लगाने की मांग की।
महंत ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में लगभग तीन सौ श्रमिकों की जान जा चुकी है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के शासन में औद्योगिक सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया है, और सरकार बड़े उद्योगपतियों के सामने पूरी तरह से नतमस्तक हो चुकी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटना की जांच के आदेश दिए और आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि घायलों को उचित चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
जिला प्रशासन ने इस घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
भाषा संजीव जितेंद्र
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