असम के चिरांग में वन विभाग के कार्यालय पर भीड़ का हमला, कई घायल
प्रशांत
- 17 Apr 2026, 08:52 PM
- Updated: 08:52 PM
कोकराझार/गुवाहाटी, 17 अप्रैल (भाषा) असम के चिरांग जिले में आरक्षित वन भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लेने के बाद शुक्रवार को उग्र भीड़ ने रनिखाता रेंज कार्यालय पर हमला कर दिया, जिसमें वनकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार भूटान सीमा के पास स्थित वन विभाग के इस कार्यालय में भीड़ ने तोड़फोड़ की और परिसर में खड़े सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मौके पर पहुंचने और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "कल वनकर्मियों ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया था, जिन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। लेकिन आज सुबह आक्रोशित भीड़ एकत्र हो गई और वनकर्मियों व कार्यालय पर पथराव किया। कुछ वाहनों को भी आग लगा दी गई।"
उन्होंने बताया कि चार से पांच वनकर्मी और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है, हालांकि उनकी सटीक संख्या का पता नहीं चल पाया है।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि कार्यालय और वाहनों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
वन विभाग कार्यालय से हथियार और गोला-बारूद लूटे जाने के दावों पर अधिकारी ने कहा, "सभी आरोपों की जांच की जाएगी।"
एक वनकर्मी ने बताया कि इस हिंसा में उसके कुछ साथी घायल हुए हैं और भीड़ ने कार्यालय के साथ-साथ आवासीय परिसर में भी तोड़फोड़ की।
अधिकारियों के मुताबिक, यह तनाव बृहस्पतिवार को उस समय शुरू हुआ जब वनकर्मियों ने सिखना ज्व्हवलाओ राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले रिपु चिरांग आरक्षित वन क्षेत्र में कथित अवैध कटाई और जमीन साफ करने के आरोप में कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लिया था।
भीड़ ने बृहस्पतिवार रात को हिरासत में लिए गए लोगों की बिना शर्त रिहाई की मांग को लेकर कार्यालय का घेराव किया था, लेकिन तब बिना किसी हिंसा के वह तितर-बितर हो गई थी।
हालांकि शुक्रवार सुबह लाठियों और अन्य हथियारों से लैस भीड़ फिर एकत्र हुई और हिंसक हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वनकर्मियों ने एक दिन पहले उनके साथ मारपीट की, जिसमें दो महिलाएं भी घायल हुईं।
स्थानीय लोगों ने कथित मारपीट में शामिल वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और नारेबाजी की। उन्होंने वन कार्यालय के फर्नीचर जलाकर और पत्थर रखकर कुछ समय के लिए सड़क भी जाम कर दी।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों से प्रशासन को अपनी शिकायतें सौंपने की अपील करते हुए कहा, "स्थानीय प्रशासन को जांच के लिए समय दें। सड़क जाम करना और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना किसी समस्या का समाधान नहीं है।"
भाषा रवि कांत प्रशांत
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