सरकार ने कृषि सहित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सभी पहलुओं पर जोर दिया है: राष्ट्रपति मुर्मू
सुरेश मनीषा
- 27 Jun 2024, 04:51 PM
- Updated: 04:51 PM
नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार किसानों की खेती पर लागत कम करने और उनकी आय बढ़ाने के अपने प्रयास के तहत प्राकृतिक खेती और इससे जुड़े उत्पादों की आपूर्ति शृंखला को सशक्त कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 10 साल में सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर अत्यधिक जोर दिया है।
मुर्मू ने 18वीं लोकसभा में पहली बार संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया भर में आजकल ‘ऑर्गेनिक’ उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और भारत के किसानों के पास इस मांग को पूरा करने की भरपूर क्षमता है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए सरकार प्राकृतिक खेती और इससे जुड़े उत्पादों की आपूर्ति शृंखला को सशक्त कर रही है। ऐसे प्रयासों से किसानों का खेती पर होने वाला खर्च भी कम होगा और उनकी आय भी बढ़ेगी।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि आज का भारत, अपनी वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी कृषि व्यवस्था में बदलाव कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हों और ज्यादा से ज्यादा निर्यात से किसानों की आमदनी बढ़े, इस सोच के साथ नीतियां बनाई गई हैं, निर्णय लिये गए हैं।’’
उन्होंने इस सिलसिले में दलहन और तिलहन में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के लिए देश के किसानों को हरसंभव मदद देने की अपनी नीतियों का उल्लेख किया।
मुर्मू ने कहा कि वैश्विक बाजार में किस तरह के खाद्य उत्पादों की मांग ज्यादा है, उसके आधार पर नयी रणनीति बनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि गांवों में कृषि आधारित उद्योगों, डेयरी और मत्स्य पालन आधारित उद्योगों का विस्तार किया जा रहा है और इसमें भी सहकारिता को प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार किसान उत्पाद संघ (एफपीओ) और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) जैसे सहकारी संगठनों का एक बड़ा नेटवर्क बना रही है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि छोटे किसानों की बड़ी समस्या भंडारण से जुड़ी होती है और इसलिए सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी भंडारण योजना पर काम शुरू किया है।
उन्होंने कहा कि किसान अपने छोटे खर्चे पूरे कर सकें, इसके लिए ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ के तहत उन्हें तीन लाख 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा राशि दी जा चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के नये कार्यकाल के शुरुआती दिनों में ही किसानों को 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है।’’
मुर्मू ने कहा कि सरकार ने खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी रिकॉर्ड वृद्धि की है।
उन्होंने ‘श्री अन्न’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘‘हमारे मोटे अनाज (श्री अन्न) की पहुंच ‘सुपरफूड’ के तौर पर दुनिया के कोने-कोने में हो, इसके लिए भी अभियान चल रहा है।’’
उन्होंने कहा कि भारत की पहल पर ही पूरी दुनिया ने वर्ष 2023 में ‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ मनाया है।
भाषा सुरेश