टिपरा मोथा प्रमुख ने त्रिपुरा आदिवासी परिषद का नाम बदलने के भाजपा के चुनावी वादे का विरोध किया
रंजन
- 06 Apr 2026, 08:27 PM
- Updated: 08:27 PM
अगरतला, छह अप्रैल (भाषा) टिप्रा मोथा पार्टी (टीएमपी) के सुप्रीमो प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उस वादे का कड़ा विरोध किया, जिसमें आगामी चुनावों में सत्ता में आने पर त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) का नाम बदलने की बात कही गई है।
उनकी यह टिप्पणी मुख्यमंत्री माणिक साहा द्वारा जनजातीय परिषद चुनावों के लिए पार्टी का घोषणापत्र जारी करने के एक दिन बाद आई है, जिसमें भाजपा के जनादेश प्राप्त होने पर टीटीएएडीसी का नाम बदलकर त्रिपुरा स्वायत्त प्रादेशिक परिषद (टीएटीसी) करने का वादा किया गया है।
गोमती जिले के अम्पी में एक सभा को संबोधित करते हुए देबबर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने घोषणापत्र के माध्यम से परिषद के नाम से "जनजातीय" शब्द हटाने का वादा किया है।
उन्होंने कहा, "मैं इस वादे से पूरी तरह असहमत हूं और गरीब टिप्रासा लोगों के साथ कोई समझौता नहीं करूंगा।"
देबबर्मा ने भाजपा नेतृत्व पर चुनाव घोषणापत्र में रोमन लिपि का इस्तेमाल करने के लिए भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा, "आप कह रहे हैं कि विदेशी मूल का हवाला देते हुए भाजपा सरकार कोकबोरोक भाषा के लिए रोमन लिपि लागू नहीं करेगी लेकिन अब आपका घोषणापत्र रोमन लिपि में लिखा गया है। हम जानते हैं कि आपके बयान और कार्यों में बड़ा अंतर है।"
भाजपा वर्तमान में राज्य में टीएमपी और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ सत्ता में है, हालांकि तीनों पार्टियां विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ रही हैं।
देबबर्मा ने जोर देकर कहा कि चुनाव भाजपा की "धनशक्ति" और टिप्रासा समुदाय के बीच की टक्कर होगी और मतदाताओं से किसी विशेष पार्टी के बजाय टिप्रासा समुदाय का समर्थन करने का आग्रह किया।
उन्होंने दावा किया कि राज्य की कुल 42 लाख आबादी में से टिप्रासा समुदाय की संख्या घटकर लगभग 15 लाख रह गई है।
उन्होंने कहा, "अगर टिप्रासा समुदाय को आदिवासी परिषद चुनावों में हार का सामना करना पड़ता है, तो उनके अस्तित्व पर संकट मंडराएगा। हम सभी को टिप्रासा समुदाय का समर्थन करना चाहिए।"
आदिवासी परिषद के लिए मतदान 12 अप्रैल को निर्धारित है और मतगणना 17 अप्रैल को होगी।
भाषा
राखी रंजन
रंजन
0604 2027 अगरतला