विकास के साथ विरासत को पुन: स्थापित कर रही है सरकार: राष्ट्रपति मुर्मू
वैभव मनीषा
- 27 Jun 2024, 01:53 PM
- Updated: 01:53 PM
नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार भविष्य निर्माण के प्रयासों और विकास के साथ ही भारतीय संस्कृति के वैभव और विरासत को फिर से स्थापित कर रही है और सरकार का यह प्रयास है कि भावी पीढ़ियों को हज़ारों वर्षों की विरासत प्रेरणा देती रहे।
राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हाल में नालंदा विश्वविद्यालय के भव्य परिसर के रूप में इसमें एक नया अध्याय जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि नालंदा सिर्फ एक विश्वविद्यालय मात्र नहीं है, बल्कि वह वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में भारत के गौरवशाली अतीत का प्रमाण है।
मुर्मू ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि नया नालंदा विश्वविद्यालय, भारत को वैश्विक ज्ञान का केंद्र बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी सरकार का यह प्रयास है कि भावी पीढ़ियों को हज़ारों वर्षों की हमारी विरासत प्रेरणा देती रहे। इसलिए पूरे देश में तीर्थस्थलों को, आस्था और अध्यात्म के केंद्रों को सजाया-संवारा जा रहा है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार, विकास के साथ ही विरासत पर भी उतना ही गर्व करते हुए काम कर रही है और विरासत पर गर्व का यह संकल्प आज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, वंचित वर्ग और सर्वसमाज के गौरव का प्रतीक बन रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। अब अगले वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि देश, रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती को भी व्यापक स्तर पर मना रहा है। पिछले महीने ही देश ने रानी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती का साल भर चलने वाला महोत्सव भी शुरू किया है।
मुर्मू ने कहा कि इससे पहले सरकार गुरु नानक देव जी का 550वां और गुरु गोबिन्द सिंह जी का 350वां प्रकाश पर्व भी धूमधाम से मना चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत के भाव से काशी तमिल संगमम, सौराष्ट्र तमिल संगमम जैसे उत्सवों की परिपाटी भी मेरी ही सरकार ने शुरू की है। इन आयोजनों से हमारी नई पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा मिलती है और राष्ट्र पर गर्व का भाव और मजबूत होता है।’’
भाषा वैभव