आयात शुल्क में छूट सही समय पर उठाया गया कदम: उद्योग जगत
अजय
- 02 Apr 2026, 09:56 PM
- Updated: 09:56 PM
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) उद्योग जगत ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर 30 जून तक तीन महीने के लिए सीमा शुल्क से छूट देना सही समय पर उठाया गया कदम है। इससे कपड़ा, पैकेजिंग और औषधि जैसे क्षेत्रों को राहत मिलेगी।
उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ''पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के समाधान के लिए भारत सरकार द्वारा 40 महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों पर 30 जून, 2026 तक पूर्ण सीमा शुल्क छूट देने का निर्णय समय पर उठाया गया व्यावहारिक कदम है।''
उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, पेंट, कपड़ा और खिलौने जैसे क्षेत्र बढ़ते कच्चे माल की लागत और सीमित मूल्य निर्धारण शक्ति का सामना कर रहे हैं। इनमें से कई श्रम गहन एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) हैं।
बनर्जी ने कहा, ''शुल्क छूट से कपड़ा, पैकेजिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को तत्काल राहत मिलेगी, जो पीटीए, मेथनॉल और एसिटिक एसिड जैसे प्रमुख मध्यवर्ती वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भर हैं। इससे लागत दबाव को कम करने, आपूर्ति स्थिरता को बनाए रखने और महंगाई की प्रवृत्ति को कम करने में भी मदद मिलेगी।''
उन्होंने राज्य और केंद्रीय करों और शुल्कों पर छूट (आरओएससीटीएल) योजना को बढ़ाने के सरकार के फैसले का भी स्वागत किया और कहा कि इससे परिधान और तैयार माल क्षेत्र के निर्यातकों को समय पर सहायता मिलेगी।
उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने कहा कि सीमा शुल्क छूट से प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कच्चे माल की लागत कम होगी। इससे आयातित कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं की कीमतें कम होंगी। इस लागत में कमी से विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए जिनमें कच्चे माल की खपत अधिक होती है, मार्जिन को बनाये रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा, ''उदाहरण के लिए, प्लास्टिक, वस्त्र और पैकेजिंग में, पेट्रोरसायन का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है और यह कुल उत्पादन लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कच्चे माल की कीमतों में कमी से परिचालन मार्जिन में सुधार होगा...।''
इसके अतिरिक्त, छूट से खरीद लागत कम करके कार्यशील पूंजी दक्षता में सुधार हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि इससे क्षमता उपयोग में भी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि कच्चे माल की कम लागत उच्च उत्पादन स्तर को प्रोत्साहित करती है।
भाषा रमण अजय
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