महाराष्ट्र: शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने मांगी माफी
माधव
- 17 Feb 2026, 04:29 PM
- Updated: 04:29 PM
मुंबई, 17 फरवरी (भाषा) छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने पर आलोचनाओं का सामना कर रहे महाराष्ट्र कांग्रेस समिति के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्द्धन सपकाल मंगलवार को माफी मांगते हुए कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
उन्होंने दोहराया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दुर्भावनापूर्ण एजेंडे के तहत सामाजिक तनाव पैदा करने के लिए उनकी टिप्पणियों को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी मूल टिप्पणी का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में विभिन्न राष्ट्रीय हस्तियों के चित्रों को एक साथ प्रदर्शित कर एकता को बढ़ावा देना था। सपकाल ने आरोप लगाया कि उनके भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से हटाकर सोशल मीडिया पर इस तरह फैलाया गया कि यह गलत धारणा बन गई कि उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से की थी।
सपकाल ने शिवाजी महाराज के कुछ अनुयायियों की भावनाएं आहत होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि वह क्षमा मांग रहे हैं क्योंकि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था।
मालेगांव महानगर पालिका की उप महापौर निहाल अहमद के कार्यालय में 18वीं सदी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान का चित्र लगाये जाने के बाद विवाद शुरू हुआ, जिसका शिवसेना पार्षदों और हिंदू संगठनों ने विरोध किया था।
सपकाल ने छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता व उनके 'स्वराज' के विचार को प्रस्तुत करने के तरीके का उल्लेख करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ टीपू सुल्तान के युद्ध आह्वान का उदाहरण दिया और दावा किया कि यह एक ऐसा आदर्श था, जिसे उन्होंने उसी तर्ज पर व्यक्त किया था।
इस कथित 'तुलना' के कारण पुणे में सपकाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा कि राज्य शिवाजी महाराज के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा।
सपकाल ने मंगलवार को इस बात पर जोर दिया कि शिवाजी महाराज उनके 'आदर्श, प्रेरणा और गौरव' हैं।
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से लड़ने में शिवाजी महाराज से प्रेरणा ली थी और ऐतिहासिक योगदानों का इस्तेमाल समाज को बांटने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने धार्मिक कलह पैदा करने के लिए दुष्प्रचार अभियान चलाया है।
सपकाल ने कहा कि इतिहास को लेकर मतभेदों का समाधान संतुलित और विद्वतापूर्ण बहस के माध्यम से किया जाना चाहिए न कि धार्मिक या जातिगत ध्रुवीकरण को बढ़ावा देकर।
भाषा जितेंद्र माधव
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