शारीरिक निष्क्रियता की वजह से 13% मधुमेह पीड़ितों में कम हो जाती है हृदय की कार्यक्षमताःअध्ययन
पवनेश
- 12 Feb 2026, 05:38 PM
- Updated: 05:38 PM
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) भारत में मधुमेह से ग्रस्त व्यक्तियों में 'हार्ट फेल्योर' के 13 प्रतिशत से अधिक मामलों का कारण शारीरिक निष्क्रियता हो सकता है। एक वैश्विक अध्ययन में यह बात सामने आई है।
'हार्ट फेल्योर' वह चिकित्सीय स्थिति है जिसमें हृदय अपनी सामान्य क्षमता से कम रक्त प्रवाहित करने लगता है।
'जर्नल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस' में ये निष्कर्ष प्रकाशित हुए हैं। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि भारत में मधुमेह से पीड़ित लोगों में 'कोरोनरी' हृदय रोग के 9.6 प्रतिशत और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं के 9.4 प्रतिशत मामले शारीरिक गतिविधि की कमी से जुड़े हो सकते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार वैश्विक स्तर पर मधुमेह से पीड़ित लोगों में 'मैक्रोवास्कुलर' (बड़ी रक्त नलियों) में जटिलताओं और 'रेटिनोपैथी' (आंखों की समस्या) के हर दस में से एक मामले में कारण शारीरिक गतिविधि न करना होता है।
ब्राजील की रियो ग्रैडे डू सुल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन की शोधकर्ता व मुख्य लेखिका जेन फेटर ने कहा, "मधुमेह की जटिलताओं को अक्सर बीमारी का अनिवार्य परिणाम माना जाता है। हमारे निष्कर्ष इस सोच को चुनौती देते हैं क्योंकि यह दिखाते हैं कि मधुमेह से पीड़ित लोगों में शारीरिक गतिविधि बढ़ाकर इन जटिलताओं को कुछ हद तक रोका जा सकता है।"
साल 2024 में 'द लैंसेट जर्नल' में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, अनुमान है कि दुनिया भर के मधुमेह मरीजों में से एक-चौथाई से अधिक लोग भारत में रहते हैं।
लंबे समय तक रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) उच्च रहने से शरीर की नसें और रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे मधुमेह संबंधी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि की सिफारिश करता है। शोधकर्ताओं ने दक्षिण एशिया समेत दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के 23 लाख से अधिक मधुमेह रोगियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया।
फेटर ने कहा, "यह अध्ययन शारीरिक गतिविधि को मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं की रोकथाम के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में प्रस्तुत करता है। मधुमेह से पीड़ित लोगों में शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने से अस्पताल में भर्ती होने, विकलांगता, और स्वास्थ्य देखभाल खर्चों में कमी आ सकती है और जीवन गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है।"
भाषा जोहेब पवनेश
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