उच्चतम न्यायालय ने जाइडस को कैंसर दवा 'निवोलुमाब' के समान उत्पाद की बिक्री रोकने से इनकार किया
सुरेश
- 11 Feb 2026, 10:28 PM
- Updated: 10:28 PM
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब (बीएमएस) द्वारा पंजीकृत जीवन रक्षक कैंसर की दवा 'निवोलुमाब' के किफायती और 'जेनेरिक बायोसिमिलर' की बिक्री कर रही जाइडस लाइफसाइंसेज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
'बायोसिमिलर दवा' वह दवा होती है जो किसी पहले से मौजूद जैविक दवा के बहुत समान होती है, लेकिन उसकी हूबहू कॉपी नहीं होती।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ बीएमएस द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जाइडस को बायोसिमिलर दवा की बिक्री से रोकने की मांग की गई थी।
पीठ ने बीएमएस को जाइडस उत्पाद की अपने पेटेंट प्राप्त दवा के साथ सीधी तुलना करने का निर्देश दिया और कहा कि इस प्रक्रिया के परिणाम के आधार पर कंपनी अंतरिम राहत के लिए उच्च न्यायालय का रुख कर सकती है।
पीठ ने निर्देश दिया कि सीधी तुलना के लिए जाइडस उत्पाद का एक नमूना 24 घंटे के भीतर बीएमएस को उपलब्ध कराया जाए।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 जनवरी को जनहित और जीवन रक्षक दवाओं तक रोगियों की पहुंच में सुधार की आवश्यकता का हवाला देते हुए जाइडस को घरेलू बाजार में कैंसर रोधी दवा के बायोसिमिलर संस्करण की बिक्री और विपणन की अनुमति दी थी।
यह आदेश जुलाई 2025 में लगाई गई उस अंतरिम रोक को रद्द करने के लिए था, जब एक एकल पीठ ने पेटेंट उल्लंघन के आधार पर जाइडस को उसके बायोसिमिलर के विपणन से रोक दिया था।
जाइडस को मई 2026 में बीएमएस पेटेंट की समाप्ति तक अपनी बायोसिमिलर दवा का विपणन करने की अनुमति दी गई थी। जाइडस के वकील ने पूछा, ''यदि आदेश डेढ़ साल तक लागू रहा, तो यह अंतिम चार महीनों तक, यानी दो मई को पेटेंट की समाप्ति तिथि तक, क्यों लागू नहीं रह सकता?''
वकील ने कहा, ''मैं उन्हें यह जीवनरक्षक दवा 30,000 रुपये प्रति शीशी के हिसाब से दे रहा हूं, जबकि वह 1,08,000 रुपये प्रति शीशी वसूल रहे हैं। कैंसर के किसी भी मरीज को 12 खुराक की आवश्यकता होती है। जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में, मैं भारत में तीसरा सबसे बड़ा विक्रेता हूं।''
अदालत ने बीएमएस के वकील से कहा, ''आपको किसी भी चरण में उचित मुआवजा दिया जा सकता है। देखिए, जिन्हें इस दवा की आवश्यकता है, उन्हें आपकी दवा नहीं मिल पाएगी।''
अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने में मुश्किल से चार महीने बचे हैं, इसलिए उत्पाद पर और प्रतिबंध न लगाना दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करता है और दवा को उन लोगों के लिए सुलभ बनाता है जिन्हें इसकी सख्त जरूरत है।
भाषा संतोष सुरेश
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