उच्च न्यायालय ने डीसीपीसीआर में रिक्त पदों को लेकर दिल्ली सरकार की खिंचाई की
अविनाश
- 06 Feb 2026, 09:11 PM
- Updated: 09:11 PM
नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) में 2023 से अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को भरने में विफल रहने के लिए शुक्रवार को नगर सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि यह इच्छाशक्ति की कमी का मामला है।
दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि ''वास्तविक कठिनाई'' है और नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने में कितना समय लगेगा, यह बताने के लिए अदालत से समय मांगा।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने पूछा, "क्या आपकी सरकार का एक भी अधिकारी इतनी देरी को उचित ठहरा सकता है?"
पीठ ने कहा, ''इस बात का आकलन करें कि आपको कितना समय लगेगा। ये वे क्षेत्र हैं जिन पर आपका ध्यान नहीं जाता...इसमें कोई कठिनाई नहीं है। कठिनाई इच्छाशक्ति की कमी है।''
अदालत ने मामले को 16 फरवरी के लिए सूचीबद्ध किया और सरकारी वकील से यह निर्देश प्राप्त करने को कहा कि चयन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कितना "न्यूनतम समय" आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान, सरकारी वकील ने कहा कि देरी हुई है, लेकिन यह " कोई प्रगति नहीं'' का मामला नहीं है।
वकील ने कहा कि पूर्व आदेशों का पालन करते हुए, चयन समिति की बैठकें दो बार आयोजित की गईं और समिति की सिफारिशें सक्षम प्राधिकारी को भेज दी गईं, जिनकी मंजूरी का अब इंतजार है।
हालांकि, अदालत ने कहा कि आश्वासनों के बावजूद अधिकारी समय पर प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहे हैं।
पीठ ने उल्लेख किया कि 11 नवंबर, 2025 को दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि जांच समिति ने अपना काम पूरा कर लिया है और आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदनों की जांच कर ली है, और चयन समिति, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री को करनी थी, की बैठक 18 नवंबर को होने की संभावना है।
अदालत ने वकील से पूछा, ''सिफारिशों को मंजूरी देने में आपको कितना समय लगेगा? हमारी समझ से परे है। जुलाई 2023 से आयोग निष्क्रिय है और अदालत के चार बार हस्तक्षेप करने के बावजूद, आपके दो-तीन बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद, आप आज तक आवश्यक कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। आप हमसे क्या उम्मीद करते हैं?"
राष्ट्रीय बाल विकास परिषद ने 2024 में दायर अपनी याचिका में कहा है कि डीसीपीसीआर दो जुलाई, 2023 से बिना अध्यक्ष के काम कर रहा है, और इतने लंबे समय तक पदों को खाली रखना दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नियमों के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश
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