इंदौर पेयजल मामला : कांग्रेस ने पीड़ितों के लिए एक-एक करोड़ का मुआवजा मांगा, बंद की चेतावनी दी
रवि कांत
- 03 Feb 2026, 09:54 PM
- Updated: 09:54 PM
इंदौर, तीन फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत को 'तंत्र के पतन' और 'भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा' का परिणाम बताते हुए मध्यप्रदेश सरकार से मंगलवार को मांग की कि मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।
प्रमुख विपक्षी दल ने चेतावनी दी कि आठ दिन में ये मांगें नहीं माने जाने पर सूबे की आर्थिक राजधानी कहा जाने वाला यह शहर बंद करा दिया जाएगा।
बड़ी तादाद में जुटे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दूषित पेयजल मामले को लेकर शहर के राजबाड़ा क्षेत्र में धरना दिया। धरने में वे लोग भी शामिल हुए जिन्होंने दूषित पेयजल के कारण अपने परिजनों को खोया है।
धरने के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से अब तक 32 लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं और ''ये मौतें किसी दुर्घटना नहीं, बल्कि तंत्र के पतन और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा का परिणाम हैं।''
उन्होंने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा,''दूषित पेयजल के कारण 32 घरों में चीखें सुनाई दे रही हैं, लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए जनता की जिंदगी सस्ती है और मृतकों के परिवारों को केवल दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।''
पटवारी ने कहा कि मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे के साथ ही नगर निगम में सरकारी नौकरी भी दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर आठ दिन के भीतर ये मांगें नहीं मानी गईं, तो कांग्रेस जनता और व्यापारियों के सहयोग से शहर को बंद कराएगी।
पेयजल मामले को लेकर सुर्खियों में चल रहा भागीरथपुरा, राज्य के काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र 'इंदौर-1' में आता है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि दूषित पेयजल से 32 लोगों की मौत पर विजयवर्गीय से अब तक इस्तीफा नहीं लिया जाना दिखाता है कि यादव 'केवल नाम के मुख्यमंत्री' रह गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 27 जनवरी को राज्य सरकार की पेश 'डेथ ऑडिट' रिपोर्ट में संभावना जताई गई थी कि भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत का संबंध इस इलाके में दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हो सकता है।
अदालत ने दूषित पेयजल मामले की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई में एक सदस्यीय आयोग गठित किया है।
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