जामिया मिल्लिया इस्लामिया की आरक्षण नीति की जांच कराने की राज्यसभा में उठी मांग
दिलीप
- 03 Feb 2026, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को भाजपा सदस्य भीम सिंह ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की आरक्षण नीति और वहां अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों के साथ कथित भेदभाव की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
भाजपा सदस्य सिंह ने उच्च सदन में विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, ''यह अत्यंत खेद का विषय है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्र संरचना और नियुक्तियों से बहुलतावादी छवि पूरी तरह गायब है। सबसे भयावह स्थिति हमारे वंचित वर्गों की है।''
उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय में कार्यरत एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के कर्मचारियों को न केवल वैधानिक सेवा लाभों और आरक्षण से वंचित रखा जाता है, बल्कि उनके साथ परिसर में दुर्व्यवहार की घटनाएं भी हो रही हैं। उन्होंने मांग की कि प्रशासन को इन शिकायतों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की आरक्षण नीति और एससी, एसटी तथा ओबीसी कर्मचारियों के साथ कथित भेदभाव की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए।
विशेष उल्लेख के जरिए ही आम आदमी पार्टी (आप) सदस्य अशोक कुमार मित्तल ने चीन के साथ पढ़ते व्यापार घाटे और घटिया चीनी उत्पादों के आयात को लेकर चिंता जतायी। वहीं, भाजपा की धर्मशीला गुप्ता ने हाल के दिनों में तेलंगाना राज्य में हजारों की संख्या में कुत्तों की निर्मम हत्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह निर्मम हत्या का मामला नहीं, बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों, संवैधानिक जिम्मेदारियों और मानवता पर गहरा प्रश्नचिह्न है।
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने व्यावसायिक वाहनों के चालकों से जुड़ा मुद्दा उठाया और उनके कल्याण के लिए राष्ट्रीय चालक आयोग गठित किए जाने की मांग की। उन्होंने राज्यों में चालक कल्याण बोर्ड स्थापित किए जाने की भी मांग की।
द्रमुक सदस्य तिरुचि शिवा ने ''नेशनल रोड सेफ्टी मिशन'' लागू किए जाने की मांग की, वहीं भाजपा के सतपाल शर्मा ने जम्मू कश्मीर एवं देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रहने वाले रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें देश से निकालने की मांग की।
बीजद सदस्य सस्मित पात्रा ने समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए कानूनों के कार्यान्वयन को मजबूत करने की सरकार से मांग की। पात्रा ने कहा कि हिंसक अपराधों, लिंग आधारित अपराधों और कमजोर समुदायों पर लक्षित हमलों में लगातार वृद्धि बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति है।
उन्होंने कहा कि यद्यपि पुलिस मुख्य रूप से राज्य का विषय है, लेकिन ऐसे अपराधों की प्रकृति, व्यापकता और निरंतरता तथा मौलिक अधिकारों, आंतरिक सुरक्षा पर इनका सीधा प्रभाव इसे एक ऐसा मुद्दा बनाता है, जिस पर केंद्र सरकार का ध्यान देना आवश्यक है।
भाषा अविनाश दिलीप
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