राष्ट्रपति मुर्मू ने विद्यार्थियों से विकास की राह में पीछे छूट गए लोगों की मदद करने का आग्रह किया
नरेश
- 03 Feb 2026, 07:20 PM
- Updated: 07:20 PM
(तस्वीर के साथ)
बालासोर/भुवनेश्वर, तीन फरवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को ओडिशा के फकीर मोहन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से विकास की राह में पिछड़ गए लोगों की मदद करने का आग्रह किया।
बालासोर स्थित इस विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समाज का विकास सभी की प्रगति में निहित है। उन्होंने कहा कि हर तरह के प्रयास में सफलता की कुंजी समर्पण है।
राष्ट्रपति ने 'व्यासकवि' फकीर मोहन सेनापति को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अपने विद्यार्थी जीवन के दौरान वे उनकी कालजयी कहानी 'रेबती' से बहुत प्रभावित हुईं और यह प्रभाव आज भी उनके मन पर अमिट है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 मातृभाषा के महत्व पर बल देती है और विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करती है।
मुर्मू ने कहा, ''भारत की ज्ञान की समृद्ध परंपरा है। हमारे शास्त्र और पांडुलिपियां ज्ञान और बुद्धिमत्ता से परिपूर्ण हैं।''
राष्ट्रपति ने कहा कि अतीत को समझकर और वर्तमान को जानकर छात्र अपना और देश का भविष्य संवार सकते हैं।
उन्होंने स्नातक छात्रों को बधाई दी और कहा कि ज्ञान, लगन और प्रतिबद्धता के बल पर वे समाज में सम्मान और पहचान हासिल कर सकते हैं।
मुर्मू ने कहा कि सफल और सार्थक जीवन एक बात नहीं है, सफल होना अच्छा है पर सार्थक जीवन जीना उससे भी बेहतर है।
उन्होंने कहा कि प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा हासिल करना महत्वपूर्ण है, लेकिन दूसरों के लिए भी कुछ करना चाहिए।
राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि फकीर मोहन विश्वविद्यालय अकादमिक अध्ययन के अतिरिक्त अनुसंधान और जनसंपर्क कार्यक्रमों को भी महत्व देता है। उन्होंने विश्वविद्यालय से अनुसंधान एवं विकास के लिए पांच गांवों को गोद लेने का आग्रह किया।
दीक्षांत समारोह में कुल 1,831 स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को उपाधियां और पदक प्रदान किए गए। अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय ने 110 स्वर्ण पदक और 89 शोधार्थियों को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की है।
इस अवसर पर तीन प्रतिष्ठित हस्तियों अनुराधा बिस्वाल (खेल), शांतनु कुमार आचार्य (साहित्य) और गुरु गोपाल चंद्र पांडा (उड़िया संगीत) को उनके संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधियां प्रदान की गईं।
भाषा संतोष नरेश
नरेश
0302 1920 बालासोर/भुवनेश्वर