असम: विपक्ष ने केंद्रीय बजट को 'आत्म-मुग्ध और कॉरपोरेट समर्थक' बताया
नरेश
- 01 Feb 2026, 09:57 PM
- Updated: 09:57 PM
गुवाहाटी, एक फरवरी (भाषा) आगामी मार्च-अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले असम में विपक्षी दलों ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 को "आत्म-मुग्ध" करार देते हुए आरोप लगाया कि यह केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों की रक्षा के लिए तैयार किया गया है।
विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि चुनावी राज्य असम के लिए बजट में कुछ भी ठोस नहीं है और इससे पूर्वोत्तर के प्रति केंद्र सरकार का "उदासीन रवैया" एक बार फिर उजागर हुआ है।
कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि केंद्रीय बजट ऐसे समय में आत्म-मुग्धता को दर्शाता है, जब देश को दूरदृष्टि और स्पष्टता की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, "बजट 2026-27 एक टेम्पलेट बजट है, जिसमें कोई ठोस रोडमैप नहीं दिखता, जबकि वैश्विक परिस्थितियों में हो रहे बदलाव दूरदर्शिता और तैयारी की मांग करते हैं।"
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता ने कहा कि यदि यह लोकसभा चुनाव का वर्ष होता, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक आक्रामक और दीर्घकालिक सुधारों वाला बजट पेश करती।
गोगोई ने कहा, "यह ऐसी सरकार का बजट लगता है, जो अगले तीन वर्षों तक सत्ता में बने रहने को लेकर निश्चिंत है। इसमें संरचनात्मक बदलाव की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है, लेकिन चुनिंदा कॉरपोरेट मित्रों और बड़े व्यापारिक हितों के लिए पर्याप्त राहत दिखाई देती है।"
उन्होंने कहा कि जहां अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और जापान जैसे देश दीर्घकालिक सुधारों के जरिए अपनी घरेलू अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत कर रहे हैं, वहीं भारत को अनिर्णय और उद्देश्यहीनता का सामना करना पड़ रहा है।
असम जातीय परिषद (एजेपी) के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट एक बार फिर असम और पूर्वोत्तर के प्रति केंद्र की उदासीनता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, "सरकार बुनियादी ढांचे में रिकॉर्ड निवेश और उत्पादन वृद्धि के दावे कर रही है, लेकिन बजट में यह स्पष्ट नहीं है कि असम को वास्तव में इसका क्या लाभ मिलेगा।"
लुरिनज्योति ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, युवाओं की बेरोजगारी और मध्यम वर्ग पर बढ़ता आर्थिक बोझ बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया, "न तो कोई सार्थक कर राहत है, न ठोस रोजगार गारंटी और न ही असम जैसे बाढ़ प्रभावित और सीमांत क्षेत्रों के लिए कोई विशेष आर्थिक पैकेज बजट में शामिल है।"
उन्होंने दावा किया कि पारदर्शी वित्तीय आवंटन के बिना भारी कर्ज के कारण असम की आर्थिक संरचना कमजोर हुई है और नयी पीढ़ी का भविष्य अनिश्चित होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि असम हर साल बाढ़ का सामना करना है, किसान परेशान हैं, चाय बागान मजदूर उपेक्षित हैं और लघु उद्योग संकट में हैं, लेकिन बजट में इन समस्याओं का कोई समाधान नहीं है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है और इसके बजाय उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है, जहां कॉरपोरेट हित सुरक्षित रहते हैं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की असम इकाई के सचिव सुप्रकाश तालुकदार ने बजट को देश के संघीय ढांचे पर "हमला" करार दिया।
उन्होंने कहा, "यह बजट केवल कॉरपोरेट क्षेत्र को लाभ पहुंचाने के लिए है। खर्च के नियंत्रण के नाम पर गरीबों के हितों में कटौती की गई है।"
राइजोर दल के महासचिव रसेल हुसैन ने आरोप लगाया कि बजट में असम और पूर्वोत्तर के लिए "कुछ भी विशेष" घोषित नहीं किया गया।
उन्होंने कहा, "यह बजट आम आदमी के लिए नहीं, बल्कि देश के कॉरपोरेट्स को बढ़ावा देने के लिए है।"
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के संगठनात्मक महासचिव और विधायक अमीनुल इस्लाम ने कहा, "बजट असम और पूर्वोत्तर के लिए बेहद निराशाजनक है। मनरेगा, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए कुछ भी खास नहीं है। हमें उम्मीद थी कि चुनाव से पहले कोई बड़ी घोषणा होगी।"
इसे "रूटीन बजट" बताते हुए इस्लाम ने कहा कि जीएसटी स्लैब और कर ढांचा भी आम लोगों के लिए उत्साहजनक नहीं है।
भाषा
राखी नरेश
नरेश
0102 2157 गुवाहाटी