बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय को 10 प्रतिशत अधिक आवंटन
नरेश
- 01 Feb 2026, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) सरकार ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 में कई कदमों की घोषणा करके स्वास्थ्य अवसंरचना, मेडिकल शिक्षा और फार्मा सेक्टर के आधुनिकीकरण और विस्तार को बढ़ावा दिया। इन कदमों में भारत को सहायक स्वास्थ्य पेशेवरों और बायोफार्मा निर्माण के लिए वैश्विक हब बनाने के प्रयास भी शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि केंद्र सरकार के बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए आवंटन बढ़ाकर 1,06,530.42 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। मंत्रालय ने इसे भारत के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों में एक ''महत्वपूर्ण मील का पत्थर'' बताया।
रोगियों, खासकर कैंसर का इलाज कराने वाले मरीजों को महत्वपूर्ण राहत देने के लिए बजट में 17 जीवनरक्षक दवाओं और औषधियों पर मूल सीमा शुल्क की पूरी छूट का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, सात और दुर्लभ बीमारियों को भी दवाओं, औषधियों और विशेष चिकित्सीय आहार को व्यक्तिगत आयात के लिए आयात शुल्क से छूट में शामिल किया गया है।
बढ़ाए गए वित्तीय आवंटन के आधार पर, बजट में मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं के तहत योजना-वार महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की गई है। इसमें ई-प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट पेश करते हुए स्वास्थ्य सुधारों के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की। उसने कहा कि यह सरकार की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
बढ़ाए गए आवंटन में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के लिए 4,821.21 करोड़ रुपये की मजबूत वित्तीय सहायता भी शामिल है, जो वित्त वर्ष 2014-15 के स्वास्थ्य बजट की तुलना में कुल मिलाकर 194 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत योजना संबंधी मद में 6,175.96 करोड़ रुपये (10.78 प्रतिशत) की वृद्धि की गई है, जबकि गैर-योजना मद में 2,500.96 करोड़ रुपये (6.32 प्रतिशत) की बढ़ोतरी हुई है।
बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के लिए आवंटन बढ़ाकर 9,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिसमें 500 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। इसी तरह, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए आवंटन बढ़ाकर 39,390.00 करोड़ रुपये किया गया है, जो 2,289.93 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी है। इसका उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में रोग नियंत्रण कार्यक्रमों को और मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम के तहत स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास को भी बड़ा जोर दिया गया है, जिसमें 4,770 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसमें 570 करोड़ रुपये केंद्रीय क्षेत्र घटक और 4,200 करोड़ रुपये केंद्रीय प्रायोजित योजना घटक के तहत पूंजीगत व्यय के रूप में शामिल हैं।
इसका मतलब है कि इस योजना के लिए 1,925 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 67.66 प्रतिशत अधिक है। यह योजना गहन देखभाल खंड, एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं, जिला और उप-जिला अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य अवसंरचना सुविधाओं के विस्तार के लिए है।
मंत्रालय ने कहा, ''केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य अवसंरचना और मेडिकल शिक्षा के आधुनिकीकरण और विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।''
मंत्रालय ने कहा कि बढ़ती उम्रदराज़ आबादी, गैर-संक्रामक रोगों का बढ़ता बोझ और कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों की वैश्विक मांग को देखते हुए सरकार ने सहायक और स्वास्थ्य पेशेवरों की शिक्षा के विस्तार और मजबूती के लिए अगले तीन वर्षों में 980 करोड़ रुपये का चरणबद्ध योजना आवंटन प्रस्तावित किया है।
इस पहल के तहत 10 प्रमुख विषयों में सहायक स्वास्थ्य पेशेवर संस्थानों की स्थापना और आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे अगले पांच वर्षों में लगभग एक लाख कुशल पेशेवर तैयार होंगे और इसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी रहेगी। इसके अलावा, एक विशेष कार्यक्रम के तहत 1.5 लाख वृद्ध देखभाल कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे भारत में बुजुर्ग आबादी की तेजी से बढ़ती लंबी अवधि की देखभाल की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
इसमें कहा गया है कि इन उपायों से जांच, रोकथाम, पुनर्वास और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और भारत कुशल संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए मानव संसाधन आवंटन, जिसमें नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, स्नातक और स्नातकोत्तर सीट का उन्नयन और नर्सिंग शिक्षा में वृद्धि शामिल है, को बढ़ाकर 1,725 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 95 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्शाता है।
बजट में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा दिया गया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), नयी दिल्ली के लिए आवंटन बढ़ाकर 4,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 26.98 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।
रोग नियंत्रण और जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्षेत्र में, राष्ट्रीय एड्स और यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए आवंटन बढ़ाकर 3,477 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 815.50 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्शाता है।
मंत्रालय ने बताया कि इसमें ब्लड ट्रांसफ्यूजन सर्विसेज के लिए सुदृढ़ समर्थन शामिल है, जिसके लिए 275 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो 75 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्शाता है। इसका उद्देश्य देश भर में रक्त की सुरक्षा, उपलब्धता और गुणवत्ता मानकों में सुधार करना है।
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत, नये एम्स की स्थापना लागत सहित, वर्ष 2026-27 के लिए कुल आवंटन 11307 करोड़ रुपये है। यह 407 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्शाता है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में योजनाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण वृद्धि के अलावा, गैर-योजना घटक के अंतर्गत भी पर्याप्त वृद्धि की गई है, जिसका उद्देश्य प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करना, सेवा वितरण में सुधार करना और स्थापना एवं परिचालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना है।
दिल्ली स्थित एम्स के लिए आवंटन बढ़ाकर 5,500.92 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 262.22 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्शाता है। केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना और पेंशनभोगियों के अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के लिए आवंटन बढ़ाकर 8697.86 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 590.90 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्शाता है। इसके अलावा, केंद्रीय अस्पतालों के लिए आवंटन बढ़ाकर 4,599.66 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 9.34 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को मजबूत करना इस सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है।
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 22 नये एम्स स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 18 शिक्षण, अनुसंधान, ओपीडी/आईपीडी, आपातकालीन और जांच सेवाओं के साथ पूरी तरह से कार्यरत हैं, जबकि शेष निर्माणाधीन हैं।
केंद्रीय बजट में भारत के औषधि नियामक और प्रवर्तन ढांचे को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया है।
मंत्रालय ने कहा, "केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को और मजबूत करने का प्रस्ताव औषधि अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को गति देगा और गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करते हुए नियामक बोझ को कम करने और व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए जारी उपायों का पूरक होगा।"
उन्नत चिकित्सा क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए, केंद्रीय बजट में 'बायो फार्मा शक्ति' पहल की शुरुआत के माध्यम से बायोफार्मास्यूटिकल क्षेत्र को एक बड़ा प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है, जिसके लिए अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का समर्पित आवंटन किया गया है।
इस रणनीतिक कार्यक्रम के तहत बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के घरेलू उत्पादन के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया जाएगा। इसका लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करना, दवाओं की किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करना और भारत को वैश्विक बायोफार्मा निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसके साथ ही नवाचार, उच्च स्तरीय शोध और उन्नत निर्माण क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस रणनीति के अंतर्गत, तीन नये राष्ट्रीय औषध शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों (एनआईपीईआर) की स्थापना और सात मौजूदा एनआईपीईआर के उन्नयन के माध्यम से एक राष्ट्रव्यापी जैव-फार्मा केंद्रित शैक्षणिक और अनुसंधान नेटवर्क स्थापित किया जाएगा, जो उच्च स्तरीय अनुसंधान, कुशल मानव संसाधन विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देगा।
इस पहल के तहत 1,000 मान्यता प्राप्त क्लीनिकल ट्रायल स्थलों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क भी स्थापित किया जाएगा, जिससे भारत के क्लीनिकल रिचर्स परिवेशी तंत्र को महत्वपूर्ण रूप से मजबूती मिलेगी, नवाचार में तेजी आएगी और देश नैतिक, उच्च गुणवत्ता वाले और कुशल क्लीनिकल ट्रायल के लिए एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित होगा।
बजट में रांची और तेजपुर में प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के आधुनिकीकरण के साथ-साथ उत्तर भारत में एनआईएमएचएएनएस की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटल रूपांतरण को तेज करने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के लिए आवंटन बढ़ाकर 350 करोड़ रुपये किया गया है, जो 25.74 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्शाता है।
साथ ही, हर जिले के अस्पताल में आपातकालीन और ट्रॉमा केयर सेंटर स्थापित करना भी प्रस्तावित है।
भाषा अमित नरेश
नरेश
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