सीरिया के रोजावा में हमले की शिकार महिलाओं के समर्थन में आए 200 कार्यकर्ता और कलाकार
धीरज
- 31 Jan 2026, 07:57 PM
- Updated: 07:57 PM
नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) सीरिया की अंतरिम सरकार के हमलों की शिकार उत्तरी और पूर्वी सीरिया (रोजावा) की महिलाओं के प्रति भारत और विदेश के करीब 200 सामाजिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों ने शनिवार को एकजुटता प्रकट की और क्षेत्र में स्थायी शांति का आह्वान किया।
कार्यकर्ताओं और कलाकारों ने शनिवार को जारी एक संयुक्त बयान में कहा कि रोजावा का 'लोकतांत्रिक स्वायत्त प्रशासन' वर्तमान में सीरिया की अंतरिम सरकार और कट्टरपंथी गुटों के हाथों 'नरसंहार अभियान' का सामना कर रहा है।
इस लोकतांत्रिक स्वायत्त प्रशासन को महिलाओं के नेतृत्व में स्वतंत्रता,समानता एवं सह-अस्तित्व का एक अद्वितीय मॉडल माना जाता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा, '' पिछले 14 वर्षों से, उत्तरी और पूर्वी सीरिया के लोकतांत्रिक स्वायत्त प्रशासन ने एक अनूठी लोकतांत्रिक व्यवस्था का निर्माण किया है जो स्वतंत्रता और समानता व सह-अस्तित्व का आदर्श है। इस लोकतांत्रिक स्वायत्त प्रशासन को अक्सर रोजावा क्रांति के नाम से जाना जाता है।''
बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति अल-शारा के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने प्रभावी रूप से इस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी है। इसमें कहा गया कि छह जनवरी के बाद से स्थिति नाटकीय रूप से स्थिति बिगड़ गई है और कट्टरपंथी समूह द्वारा महिलाओं के अपहरण और उनके खिलाफ यौन अपराध हो रहे हैं।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि मौजूदा तनाव महिलाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि ''व्यवस्थित रूप से हिंसा फैलाकर महिलाओं की हत्या की जा रही है।''
इस बयान में विशेष रूप से कोबाने की घेराबंदी का जिक्र किया गया है जहां नाकेबंदी के कारण पानी, भोजन और बिजली की आपूर्ति बाधित हो गई और कई बच्चों की मौत हो गई। यह शहर आईएसआईएस की पराजय के लिए जाना जाता है ।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भीषण हिंसा के दौर के बाद 30 जनवरी को हुए युद्ध विराम का स्वागत किया और एक स्थायी शांति का आह्वान किया जो संवैधानिक रूप से कुर्द लोगों के अधिकारों की गारंटी दे और महिला क्रांति की कठिन परिश्रम से प्राप्त उपलब्धियों की रक्षा करे।
इस बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में अर्थशास्त्री जीन ड्रेज़, नर्तकी और कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई, फिल्म निर्माता आनंद पटवर्धन, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा, लेखक राम पुनियानी और कार्यकर्ता शबनम हाशमी प्रमुख हैं।
उत्तरपूर्वी सीरिया में मुख्य रूप से कुर्द स्वशासित क्षेत्र रोजावा में सीरियाई के सरकारी बलों और सहयोगी समूहों द्वारा नियंत्रण स्थापित करने के लिए लड़ाई चल रही है। युद्धविराम के प्रयासों के बावजूद गोलाबारी और नागरिक हताहतों की खबरें आ रही हैं।
कुर्द नेतृत्व वाली सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) और सीरियाई सरकार ने 30 जनवरी को एक युद्धविराम समझौते पर सहमति जताई, जिसका उद्देश्य संघर्ष पर विराम लगाकर स्थिरता लाना है।
भाषा
राजकुमार धीरज
धीरज
3101 1957 दिल्ली