भूजल उपयोग विवरण उपलब्ध नहीं कराने को लेकर 12 क्रिकेट स्टेडियम पर जुर्माना
पारुल
- 31 Jan 2026, 06:39 PM
- Updated: 06:39 PM
नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने क्रिकेट के मैदानों के रखरखाव के लिए भूजल का उपयोग किए जाने के संबंध में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) के समक्ष जवाब दाखिल करने में विफल रहने को लेकर देश भर के 12 क्रिकेट स्टेडियम पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अधिकरण ने पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के अंतर्गत आने वाले मोहाली स्थित आईएस बिंद्रा स्टेडियम को बिना किसी मल-जल शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्थापित किए, मैदान के रखरखाव के लिए 6,000 किलो लीटर प्रति माह (केएलएम) भूजल का उपयोग करने के लिए फटकार भी लगाई।
हरित अधिकरण शोधित पानी के बजाय, क्रिकेट मैदानों के रखरखाव के लिए भूजल या मीठे पानी के उपयोग और भूजल के भंडारण के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली की स्थापना न करने के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
एनजीटी अध्यक्ष प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि सीजीडब्ल्यूए की एक रिपोर्ट से पता चला है कि 12 स्टेडियम या क्रिकेट संघों ने मीठे पानी के उपयोग के संबंध में विवरण प्रदान करने के लिए अधिकरण के पूर्व के आदेश का पालन नहीं किया।
इनमें दिल्ली स्थित अरुण जेटली स्टेडियम, जयपुर का सवाई मानसिंह स्टेडियम, मुंबई का डीवाई पाटिल स्टेडियम, इंदौर स्थित होलकर स्टेडियम, पुणे का एमसीए क्रिकेट स्टेडियम, कानपुर का ग्रीन पार्क स्टेडियम, लखनऊ स्थित अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम, हैदराबाद का राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, धर्मशाला स्थित हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम, कटक स्थित बाराबती स्टेडियम, राजकोट स्थित सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम और रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम शामिल हैं।
अधिकरण के 22 जनवरी के आदेश में कहा गया है, ''इन क्रिकेट संघों के रिपोर्ट दाखिल न करने के कारण इस मामले में निर्णय लेने में देरी हो रही है। इसलिए, उक्त 12 क्रिकेट संघों में से प्रत्येक पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है, जिन्होंने सीजीडब्ल्यूए को जवाब की प्रति नहीं सौंपी है।''
सीजीडब्ल्यूए की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अधिकरण ने कहा कि आईएस बिंद्रा स्टेडियम मैदान के रखरखाव के लिए 6,000 केएलएम भूजल का उपयोग कर रहा है और उसने कोई एसटीपी स्थापित नहीं किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आस-पास के एसटीपी से शोधित जल की उपलब्धता होने के बावजूद मीठे पानी का इस्तेमाल किया जा रहा।
पीठ ने कहा, ''यह दलील कि शोधित पानी उपलब्ध नहीं है, स्वीकार नहीं की जा सकती। ऐसा प्रतीत होता है कि पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के तहत आने वाला आईएस बिंद्रा स्टेडियम अधिकरण के आदेशों का पालन करने का इच्छुक नहीं है और एसटीपी-शोधित पानी का उपयोग किए बिना, वह भूजल का इस्तेमाल जारी रखने का इरादा रखता है, जिसका पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।''
अधिकरण ने कहा कि अन्य क्रिकेट संघों की भी ''कुछ इसी तरह की स्थिति'' है।
उसने कहा, ''(सीजीडब्ल्यूए की ओर से पेश) रिपोर्ट दर्शाती है कि विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन के तहत जामथा, नागपुर; बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के तहत ईडन गार्डन, कोलकाता; चौधरी बंसी लाल क्रिकेट स्टेडियम, लाहली (हरियाणा); कार्यावट्टम स्पोर्ट्स फैसिलिटीज लिमिटेड, केरल; और एसीए स्टेडियम, बारासपारा (गुवाहाटी) भूजल का उपयोग कर रहे हैं।''
अधिकरण ने इन स्टेडियम से छह सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
पीठ ने रेखांकित किया कि इन स्टेडियम या क्रिकेट संघों को क्रिकेट मैदान के रखरखव के वास्ते भूजल के उपयोग से बचने के लिए अब तक किए गए उपायों की जानकारी देनी होगी।
मामले में आगे की सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई है।
भाषा सुभाष पारुल
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