भारतीय तटरक्षक बल एक फरवरी को अपना 50वां स्थापना दिवस मनायेगा
संतोष
- 31 Jan 2026, 05:48 PM
- Updated: 05:48 PM
नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) अब 155 जहाजों और 80 विमानों से युक्त एक ''शक्तिशाली समुद्री बल'' के रूप में विकसित हो गया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि आईसीजी रविवार को यहां एक समारोह में अपना 50वां स्थापना दिवस मनायेगा, जो राष्ट्र के प्रति समर्पित और निस्वार्थ सेवा के पांच दशकों का प्रतीक है।
एक फरवरी, 1977 को स्थापित आईसीजी की परिकल्पना उभरती समुद्री चुनौतियों का समाधान करने और भारत के बढ़ते समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए की गई थी।
आईसीजी ने कहा, ''1977 में सिर्फ सात सतही प्लेटफार्म के साथ अपनी शुरुआत से, आईसीजी आज 155 जहाजों और 80 विमानों से युक्त एक दुर्जेय समुद्री बल के रूप में विकसित हो गया है।''
इसने कहा कि 2030 तक, आईसीजी बल स्तर से संबंधित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तैयार है, जिसमें 200 सतही प्लेटफॉर्म और 100 विमान शामिल होंगे। इस प्रकार यह विश्व की प्रमुख तटीय सुरक्षा सेवाओं में से एक के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
आईसीजी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अपनी स्थापना के बाद से, इस संगठन ने ''11,800 से अधिक लोगों की जान बचाई है'', करुणा और साहस से परिभाषित एक विरासत बनाई है, और इसे 'समुद्र के रक्षक' के रूप में स्थायी मान्यता प्राप्त है।
आईसीजी ने एक बयान में कहा कि इस संगठन का मुख्यालय दिल्ली में है और यह बल भारत के 20.1 लाख वर्ग किलोमीटर के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और 11,098.01 किलोमीटर की तटरेखा की निगरानी करता है।
अधिकारियों ने बताया कि सामान्य शुरुआत के बाद यह एक शक्तिशाली, बहुमुखी और सम्मानित बल के रूप में उभरा जिसे समुद्री कानून प्रवर्तन, तटीय सुरक्षा, खोज और बचाव, समुद्री पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सहायता का दायित्व सौंपा गया है।
उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय नौसेना के साथ घनिष्ठ समन्वय से लेकर लक्षद्वीप में साहसिक बचाव अभियानों और हाल के महीनों में केरल तट पर तीन प्रमुख समुद्री घटनाओं के सुदृढ़ प्रबंधन तक, आईसीजी ने समुद्री आपात स्थितियों में अपनी तत्परता का प्रदर्शन किया है।
बयान के अनुसार 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के दृष्टिकोण के अनुरूप, आईसीजी स्वदेशी रूप से निर्मित जहाजों, विमानों, हेलीकॉप्टरों और उन्नत निगरानी प्रणालियों को शामिल करके आत्मनिर्भरता की ओर निरंतर अग्रसर है। इसके साथ ही यह बुनियादी ढांचे के विकास और कर्मियों के कल्याण को भी प्राथमिकता दे रहा है।
आईसीजी ने कहा कि इस बदलते युग में, भारत के समुद्र केवल सीमाएं नहीं हैं जिनकी सुरक्षा की जरूरत है, बल्कि ये ''साझेदारी, प्रगति और साझा नियति के मार्ग'' हैं।
इसने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने 50वें स्थापना दिवस से पहले, आईसीजी के सभी कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए इसकी उल्लेखनीय उपलब्धियों की सराहना की और भारत के समुद्री हितों की रक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।
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देवेंद्र संतोष
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