दहेज की मांग से परेशान महिला के आत्महत्या करने पर अदालत ने पति, ससुरालियों को दोषी ठहराया
सुरेश
- 27 Jan 2026, 09:43 PM
- Updated: 09:43 PM
नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने एक महिला की आत्महत्या के संबंध में उसके पति और सास-ससुर को दोषी ठहराया तथा कहा कि पीड़िता लगातार दहेज की मांगों का शिकार थी।
आरोप है कि महिला की मृत्यु से कुछ घंटे पहले उसके माता-पिता के सामने उससे मारपीट की गई थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. गुप्ता ने सचिन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304बी (दहेज हत्या) और 498ए (क्रूरता) के तहत दोषी ठहराया, जबकि उनके माता-पिता मणि राम और द्रौपदी को धारा 498ए तथा 34 (साझा मंशा) के तहत दोषी ठहराया गया।
अदालत ने गौर किया कि 19 जनवरी 2024 को दक्षिण दिल्ली के शांति कॉलोनी स्थित अपने ससुराल में ज्योति फंदे पर लटकी हुई पाई गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ''फंदा लगने के कारण दम घुटना'' बताया गया।
दंपति की शादी जुलाई 2018 में हुई थी।
ज्योति की मां और भाई ने गवाही दी कि शादी के समय उन्होंने सचिन को घर का सामान, एक लाख रुपये, सोने की चेन और सोने की अंगूठी दी थी। हालांकि, शादी के दो साल बाद ज्योति को कम दहेज लाने के लिए बार-बार परेशान किया गया और उसके पति द्वारा ऑटो-रिक्शा खरीदने के लिए कथित तौर पर मांगे गए पांच लाख रुपये को लेकर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
ज्योति एक जनवरी को अपने मायके में अपनी मां के पास 15-17 दिनों के लिए रहने गई और 18 जनवरी की रात को सचिन ने ज्योति के परिवार के सामने उससे मारपीट की।
उसके पति और ससुराल वालों ने उसपर जबरन उसके ससुराल वापस चलने का दबाव बनाया।
मौत से कुछ घंटे पहले 19 जनवरी को ज्योति ने अपनी मां से फोन पर बात की, जिसमें उसने बताया कि सचिन उस वक्त भी उसकी पिटाई कर रहा था। उसी शाम बाद में वह फंदे पर लटकी हुई पाई गई।
अदालत ने 22 जनवरी को दिए गए फैसले में कहा, ''आरोप स्पष्ट हैं, अस्पष्ट नहीं। ये तिथिवार और घटनावार भी हैं।''
अदालत ने कहा, ''जहां तक आरोपी सचिन का संबंध है अभियोजन पक्ष स्पष्ट, ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से यह साबित करने में सक्षम रहा है कि आरोपी ने दहेज की अपनी गैरकानूनी मांग को पूरा करने के लिए मृतक पर क्रूरता की, जिसके कारण महिला ने आत्महत्या कर ली।''
हालांकि, अदालत ने फैसला सुनाया कि सचिन के माता-पिता की भूमिका केवल क्रूरता तक सीमित थी, क्योंकि मृत्यु से ठीक पहले उनके द्वारा उत्पीड़न के कोई विशिष्ट आरोप नहीं थे। इसलिए, पीड़ित की मृत्यु के कारण को सचिन के माता-पिता से ''निश्चित रूप से'' नहीं जोड़ा जा सकता था।
माता-पिता से संबंधित मामले की सुनवाई 30 जनवरी को अलग से निर्धारित की गई है।
भाषा यासिर सुरेश
सुरेश
2701 2143 दिल्ली