यूसीसी लागू होने से उत्तराखंड में महिला सशक्तीकरण का एक नया युग शुरू हुआ : धामी
शफीक
- 27 Jan 2026, 08:29 PM
- Updated: 08:29 PM
देहरादून, 27 जनवरी (भाषा) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने से महिला सशक्तीकरण का एक नया युग शुरू हुआ है और इसके लागू होने के बाद प्रदेश में 'हलाला' का एक भी मामला सामने नहीं आया।
'यूसीसी दिवस' के रूप मे मनाई जा रही यूसीसी क्रियान्वयन की पहली वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को सबोधित करते हुए धामी ने कहा कि समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई थी।
उन्होंने कहा, ''यूसीसी लागू होने से न केवल राज्य के सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं बल्कि प्रदेश में महिला सशक्तीकरण के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है।''
धामी ने कहा, ''अब उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में हलाला का एक भी मामला सामने नहीं आया और यही कारण है कि मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है।''
मुख्यमंत्री ने हालांकि यह भी कहा कि अभी प्रदेश में बहु विवाह के कुछ मामले सामने आए हैं जिनमें सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उत्तराखंड, यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
धामी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण, यूसीसी को लागू करने का साहस नहीं दिखाया गया जबकि दुनिया के प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों सहित सभी विकसित और सभ्य देशों में समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहब आंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने यूसीसी को संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में सम्मिलित किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने यूसीसी लाने का वादा किया था जिस पर जनता ने उन्हें समर्थन दिया।
धामी ने कहा कि नयी सरकार बनते ही काम शुरू कर दिया गया और सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए 27 जनवरी 2025 को इसे लागू कर दिया गया।
इस दिन को उत्तराखंड के इतिहास का 'स्वर्णिम अध्याय' बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लिए निजी तौर पर भी अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्होंने यूसीसी को घोषणा से लेकर धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करके दिखाया।
मुख्यमंत्री ने फिर दोहराया कि यूसीसी किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है बल्कि यह समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों में "समानता से समरसता'' स्थापित करने का एक कानूनी प्रयास है।
उन्होंने कहा, ''इस कानून के माध्यम से किसी भी धर्म की मूल मान्यताओं और प्रथाओं को नहीं बदला गया है, केवल कुप्रथाओं को दूर किया गया है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में राज्य सरकार यूसीसी में आवश्यक संशोधनों से संबंधित एक अध्यादेश लायी है जिसके तहत विवाह के समय अपनी पहचान छिपाने या गलत तथ्य बताने पर ऐसे विवाहों को निरस्त करने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, विवाह एवं सहजीवन संबंधों में किसी भी प्रकार के बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।
धामी ने यूसीसी में योगदान देने वाले अधिकारियों और पंजीकरण में सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया।
भाषा दीप्ति
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