दिल्ली: डीयूएसआईबी को मरीजों और उनके परिजनों के लिए आपातकालीन योजना तैयार करने का निर्देश
माधव
- 27 Jan 2026, 08:26 PM
- Updated: 08:26 PM
नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को प्रमुख सरकारी अस्पतालों के बाहर डेरा डाले मरीजों और उनके परिचारकों को खराब मौसम के दौरान बचाने के लिए आपातकालीन कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि बोर्ड द्वारा लू और शीत लहर की स्थितियों से निपटने के लिए दो वार्षिक अल्पकालिक आपातकालीन कार्य योजनाएं तैयार की जाएंगी, जिन्हें इस मामले की निगरानी करने वाली समिति की मंजूरी के बाद लागू किया जाना आवश्यक है।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) के बाहर इलाज की प्रतीक्षा में सड़कों पर डेरा डाले मरीजों और उनके परिजनों की 'दयनीय स्थिति' पर एक खबर का संज्ञान लेने के बाद शुरू उच्च न्यायालय द्वारा की गई स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने कहा कि गर्मी की योजना जनवरी-फरवरी में तैयार की जानी चाहिए और मई-जून में लू चलने की स्थिति शुरू होते ही इसे लागू किया जाना चाहिए, जिसे जुलाई-अगस्त में भी बढ़ाया जा सकता है।
पीठ ने कहा कि शीत लहर से निपटने की योजना जुलाई-अगस्त में तैयार की जानी चाहिए और इसे दिसंबर, जनवरी और फरवरी में लागू किया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि इन कार्य योजनाओं को समन्वय बैठक के दौरान दक्षिण जिले के प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है, जिसके बाद इन्हें लागू किया जा सकता है।
अदालत ने पाया कि एम्स ने चिन्हित परिसर स्थानों पर मरीजों व उनके परिचारकों के लिए समन्वित कल्याण और सहायता उपायों के संबंध में एक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की है तथा इसमें आश्रय, परिवहन, सुरक्षा, स्वच्छता, खाद्य सहायता व जमीनी निगरानी जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया कि डीयूएसआईबी, नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों के सहयोग से समन्वित प्रयासों को तेज किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एम्स ने अपने परिसर के अंदर और आसपास कई निर्धारित स्थानों पर आश्रय सुविधाओं को शुरू व बेहतर बनाया है तथा इन सभी स्थानों पर 750 बिस्तर पूरी तरह से भरे हुए हैं, जो उच्च मांग और प्रभावी उपयोग को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अस्पताल के सुरक्षा कर्मचारियों ने दिल्ली पुलिस के समन्वय से, फुटपाथ पर प्रतीक्षा कर रहे मरीजों और उनके परिचारकों को निर्धारित तंबू लगे आश्रयों में स्थानांतरित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, "इससे व्यवस्थित स्थानांतरण, बढ़ी हुई सुरक्षा और खराब मौसम से बचाव सुनिश्चित हुआ है। मरीजों और परिचारकों की सुरक्षित आंतरिक आवाजाही के लिए निःशुल्क ई-शटल सेवाएं भी प्रदान की गई हैं।"
भाषा जितेंद्र माधव
माधव
2701 2026 दिल्ली