त्रिपुरा सरकार कोकबोरोक भाषा के लिए रोमन लिपि की अनुमति नहीं देगी: मुख्यमंत्री साहा
माधव
- 27 Jan 2026, 06:48 PM
- Updated: 06:48 PM
अगरतला, 27 जनवरी (भाषा) त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मंगलवार को राज्य की लगभग 19 जनजातियों द्वारा बोली जाने वाली कोकबोरोक भाषा के लिए रोमन लिपि लागू करने की मांग को खारिज कर दिया।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी दल टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के चुनावों से पहले यह मांग उठाई थी, जिसके बाद साहा का बयान आया है।
कोकबोरोक, पूर्वोत्तर राज्य की लगभग 14 लाख आबादी वाली 19 जनजातियों में से अधिकांश की मातृभाषा है।
मुख्यमंत्री ने दक्षिण त्रिपुरा के जोलाईबारी में एक पार्टी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "हम कोकबोरोक भाषा के लिए रोमन लिपि को कभी स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि यह स्वदेशी परंपरा और संस्कृति के लिए खतरा है। अगर रोमन लिपि को उनकी भाषा के लिए अपनाया गया तो युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति को पूरी तरह से भूल जाएगी।"
उन्होंने आदिवासी बुद्धिजीवियों से कोकबोरोक भाषा के लिए अपनी लिपि विकसित करने और उसके उचित विकास का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार स्वदेशी भाषा के लिए बंगाली या किसी अन्य लिपि पर जोर नहीं दे रही है।
साहा ने कहा, "अगर चकमा जनजाति के लोग अपनी लिपि विकसित कर सकते हैं, तो कोकबोरोक भाषी लोग पिछड़े क्यों रहें? लिपि का मुद्दा उठाकर युवा पीढ़ी को भ्रमित किया जा रहा है।"
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि केवल भाजपा ही आदिवासी लोगों के जीवन स्तर, उनकी संस्कृति और परंपरा का विकास कर सकती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पूर्वोत्तर राज्य के निर्माण में योगदान देने वाले माणिक्य साम्राज्य को सम्मान देना शुरू कर दिया है।
साहा ने कहा, "राज्य में वामपंथी शासन के दौरान माणिक्य वंश के वंशजों को उनके महलों तक ही सीमित कर दिया गया था। भाजपा ने ही माणिक्य वंश को सम्मान देना शुरू किया। हम इस बात को लेकर कुछ नहीं कर सकते कि यदि कोई समुचित तरीके से सम्मान प्राप्त करने में विफल रहता है।"
मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा ने 28 सदस्यीय आदिवासी परिषद के पिछले चुनाव में 11 सीट पर चुनाव लड़ा और नौ सीट पर जीत हासिल की।
वर्तमान परिषद का कार्यकाल 18 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।
भाषा जितेंद्र माधव
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