कर्नाटक: टोल कर्मचारियों पर 'ऑपरेशन पराक्रम' में भाग लेने वाले पूर्व सैनिक से बदसलूकी का आरोप
दिलीप
- 27 Jan 2026, 06:14 PM
- Updated: 06:14 PM
उडुपी, 27 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के उडुपी में टोल प्लाजा कर्मचारियों ने सेना के एक अभियान के दौरान अपने दोनों पैर गंवाने वाले एक सेवानिवृत्त कमांडो से बदसलूकी की। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि यह घटना 26 जनवरी को कुंडापुर के पास सस्थाना टोल प्लाजा पर हुई।
टोल बूथ पर सैनिक द्वारा रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो वायरल हो गया, जिससे व्यापक जन आक्रोश फैल गया है।
केरल के कासरगोड जिले के एडानेरू निवासी 42 वर्षीय पूर्व सैनिक श्यामराज 'एलीट 21 पैरामिलिट्री यूनिट' में सेवारत थे।
'ऑपरेशन पराक्रम' के दौरान श्यामराज को गंभीर चोटें आईं और उन्हें अपने दोनों पैर गंवाने पड़े, जिस कारण वह आज व्हीलचेयर पर निर्भर हैं।
श्यामराज को वीडियो में यह समझाते हुए देखा जा सकता है कि उनके पास भारत सरकार द्वारा जारी वैध पहचान पत्र और टोल से छूट का पास है।
पूर्व सैनिक ने टोलकर्मियों को बताया कि उन्होंने देश भर में अन्य टोल बूथ पर बिना टोल चुकाए यात्रा की है, लेकिन सस्थाना में उन्हें रोककर टोल चुकाने को कहा गया।
उन्होंने दो टोल कर्मचारियों का नाम लेते हुए कहा, "मैं 'ऑपरेशन पराक्रम' के दौरान घायल हुआ सैनिक हूं। मेरे पास टोल से छूट के सभी दस्तावेज हैं। बाकी सभी जगहों पर मुझे जाने दिया गया, लेकिन यहां मुझे रोका जा रहा है।"
श्यामराज ने अपने साथ हुए इस व्यवहार पर सवाल उठाते हुए पूछा, "क्या आप देख सकते हैं कि मैं इस व्हीलचेयर पर क्यों बैठा हूं? क्या देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिक के साथ इस तरह से व्यवहार किया जाता है?"
'ऑपरेशन पराक्रम' दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकवादी हमले के जवाब में 10 महीने से अधिक समय तक (दिसंबर 2001-अक्टूबर 2002) चला एक सैन्य अभियान था।
इस घटना के दौरान श्यामराज बेहद परेशान दिखे और उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा नियमों के तहत युद्ध में घायल हुए सैनिकों को टोल भुगतान से छूट प्राप्त है।
टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने कहा कि वे उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर काम कर रहे थे और उन्हें इस छूट की जानकारी नहीं थी।
इस बहस से तनाव और बढ़ गया, श्यामराज ने दिव्यांग पूर्व सैनिकों के प्रति दिखाई गई असंवेदनशीलता पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
इस घटना की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है, कई लोग इसमें शामिल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और रक्षा कर्मियों व युद्ध में घायल हुए सैनिकों के लिए टोल नियमों के संबंध में बेहतर प्रशिक्षण की अपील की।
भाषा जितेंद्र दिलीप
दिलीप
2701 1814 उडुपी