भारत-ईयू ने एफटीए वार्ता पूरी की, परिधान, रसायनों के लिए शून्य शुल्क; कार, वाइन के लिए रियायती पहुंच
रमण
- 27 Jan 2026, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की।
एक अधिकारी ने बताया कि इस समझौते के तहत परिधान, रसायन और जूते-चप्पल जैसे कई घरेलू क्षेत्रों को 27 देशों के इस समूह में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। वहीं, यूरोपीय संघ (ईयू) को कार और वाइन के लिए रियायती शुल्क पर भारतीय बाजार तक पहुंच प्राप्त होगी।
दो दशकों से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद संपन्न हुए इस समझौते को 'अबतक का सबसे बड़ा' समझौता कहा गया है। यह लगभग दो अरब लोगों का बाजार तैयार करेगा।
अधिकारी ने कहा कि वाहन और इस्पात को छोड़कर, भारत के लगभग सभी सामानों (93 प्रतिशत से अधिक) को यूरोपीय संघ में शून्य-शुल्क पहुंच मिलेगी। बाकी छह प्रतिशत से अधिक वस्तुओं के लिए भारतीय निर्यातकों को शुल्क में कटौती और कोटा-आधारित शुल्क रियायतें (जैसे ऑटोमोबाइल के लिए) मिलेंगी।
कुल मिलाकर भारत और ईयू वैश्विक जीडीपी में 25 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार (लगभग 33,000 अरब डॉलर) में एक-तिहाई (लगभग 11,000 अरब डॉलर) का योगदान देते हैं।
ईयू के शीर्ष नेताओं उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा के साथ शिखर स्तर की वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ अपने इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया है।
मोदी ने कहा, ''यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है। यह साझा समृद्धि के लिए एक नया खाका है।''
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह एक ऐसा समझौता है जो मूल्य के आधार पर भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को बाजार पहुंच प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि यह समझौता देश के वैश्विक व्यापार जुड़ाव में एक रणनीतिक सफलता है, जो 1.4 अरब लोगों के लिए 20,000 अरब डॉलर के ईयू बाजार में विशाल अवसर खोलेगा।
यूरोपीय संघ इस मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के साथ ही पहले दिन भारत के 90 प्रतिशत सामानों पर आयात शुल्क समाप्त कर देगा। यह समझौता अगले साल की शुरुआत में लागू होने की उम्मीद है। अन्य तीन प्रतिशत वस्तुओं पर शुल्क को सात वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा।
उम्मीद है कि इस समझौते पर इस साल के अंत में हस्ताक्षर होंगे और इसके 2027 की शुरुआत में लागू होने की संभावना है।
अधिकारी ने कहा, ''इस प्रकार ईयू द्वारा भारत को व्यापार मूल्य के 99.5 प्रतिशत हिस्से पर रियायतें दी जा रही हैं।''
दूसरी ओर, यूरोपीय संघ को भारत में दस वर्षों की अवधि में अपने 93 प्रतिशत सामानों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। भारत समझौते को लागू करने के पहले दिन यूरोपीय वस्तुओं के केवल 30 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क हटाएगा।
भारत यूरोपीय संघ को व्यापार मूल्य के 3.7 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क रियायतें और कोटा-आधारित कटौती भी दे रहा है। कुल मिलाकर, भारत ईयू को व्यापार मूल्य के 97.5 प्रतिशत पर शुल्क रियायतें दे रहा है।
अधिकारी ने बताया कि शुल्क-मुक्त पहुंच पाने वाले प्रमुख भारतीय क्षेत्रों में कपड़ा, परिधान, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक, रबर, चमड़ा और जूते-चप्पल शामिल हैं। इसके अलावा आधार धातु, रत्न और आभूषण, फर्नीचर, खिलौने और खेल के सामान को भी यह लाभ मिलेगा।
इस समय इन क्षेत्रों पर यूरोपीय संघ में शून्य से 26 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। भारत ने एफटीए के तहत ईयू की वस्तुओं के लिए भी शुल्क को उदार बनाया है।
अधिकारी ने कहा, ''हमारे मामले में, भारत 10 वर्षों में ईयू के लिए आयात शुल्क को घटाकर शून्य कर देगा। शुरुआत में शून्य तक की कमी सीमित है। समझौते के लागू होने पर हम अपने व्यापार मूल्य के 30 प्रतिशत तक की कटौती करेंगे। लेकिन धीरे-धीरे, हम अपने कुल द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के 93 प्रतिशत पर शून्य तक पहुंच जाएंगे।''
सेवाओं के मोर्चे पर यूरोपीय संघ ने भारत को अपने अब तक के सबसे अच्छे प्रस्तावों में से एक दिया है। उसने 155 उप-क्षेत्रों में 144 को खोल दिया है, जबकि भारत उनके लिए 102 उप-क्षेत्र खोल रहा है।
अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा छात्रों की आवाजाही को लेकर भी प्रतिबद्धताएं हैं। उन्होंने कहा, ''हमारे पास यूरोपीय संघ से पढ़ाई के बाद कामकाजी वीजा पर भी कुछ प्रतिबद्धताएं हैं।''
वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के अलावा, एफटीए में डिजिटल व्यापार, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपायों, व्यापार में तकनीकी बाधाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर अध्याय शामिल हैं। इसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और सरकारी खरीद पर कोई अध्याय नहीं है।
यूरोपीय संघ का औसत शुल्क पहले से ही कम है। ये लगभग 3.8 प्रतिशत हैं और व्यापार सौदे के तहत उन्हें भारत के लिए घटाकर 0.1 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
कुछ क्षेत्रों में शुल्क अधिक हैं। इनमें समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक और रबर शामिल हैं। इन सभी पर यूरोपीय संघ व्यापार सौदे के तहत भारत के लिए शुल्क समाप्त कर देगा। वर्ष 2024 में इन क्षेत्रों से भारत का निर्यात कुल 35 अरब डॉलर था। कार्यान्वयन के पहले दिन 33.5 अरब डॉलर पर शुल्क हटा दिया जाएगा। बाकी पर यह तीन, पांच और सात वर्षों में 'शून्य' हो जाएगा।
वाहन क्षेत्र में दोनों पक्षों ने कोटा आधारित शुल्क रियायतों पर बातचीत की है, क्योंकि इस क्षेत्र में यूरोपीय संघ की मांग बहुत आक्रामक है।
भारत का वाहन क्षेत्र काफी हद तक छोटी कारों (खुदरा कीमतें 10 लाख रुपये से 25 लाख रुपये) के दबदबे वाला है। इस खंड में यूरोपीय संघ की रुचि बहुत अधिक नहीं है।
अधिकारी ने कहा, ''हमने तय किया है कि जो कारें इस देश में 25 लाख रुपये से कम में बिकने वाली हैं, ईयू उन कारों का भारत में निर्यात नहीं करेगा। वे इनका विनिर्माण यहां कर सकते हैं।''
दूसरी ओर 25 लाख रुपये से ऊपर भारत का बाजार सीमित है, लेकिन ईयू की इसमें रुचि अधिक है क्योंकि वे इस खंड में अच्छे विनिर्माता हैं। इस समय वाहन पर भारत का आयात शुल्क 66 प्रतिशत से 125 प्रतिशत तक है। भारत कोटे से बाहर कोई शुल्क कटौती नहीं देगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भारत का कोटा समझौते के पांचवें वर्ष से शुरू होगा।
ईवी के लिए शुल्क कटौती अलग-अलग खंड में भिन्न होगी। अधिकारी ने कहा, ''पहले साल में कुछ खंड में यह 35 फीसदी और कुछ में 30 फीसदी होगी। फिर यह धीरे-धीरे नीचे जाएगी।''
ईयू की प्रमुख वस्तुओं जिन्हें शुल्क रियायत मिलेगी उनमें वाहन, वाइन, स्पिरिट, बीयर, जैतून का तेल, कीवी और नाशपाती, फलों के रस, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट, पेट फूड, भेड़ का मांस, सॉसेज और अन्य मांस उत्पाद शामिल हैं।
इन वस्तुओं पर इस समय 33 प्रतिशत से 150 प्रतिशत की सीमा में शुल्क लगता है। एक अधिकारी ने कहा कि द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के बाद भारतीय बाजार में बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, लेम्बोर्गिनी, पोर्श और ऑडी जैसी प्रीमियम लक्जरी यूरोपीय कारों के सस्ते होने की संभावना है, क्योंकि भारत इस समझौते के तहत कोटा-आधारित आयात शुल्क रियायतें देगा।
ईयू भारतीय ऑटोमोबाइल के लिए चरणबद्ध तरीके से शुल्क समाप्त करेगा, जबकि भारत ईयू की कारों के लिए शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर देगा, जो प्रति वर्ष 2.5 लाख के कोटे के अधीन होगा।
समझौते के तहत मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उपकरण, विमान और अंतरिक्ष यान, ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल उपकरण, प्लास्टिक, रसायन, लोहा और इस्पात, तथा फार्मा जैसे ईयू सामानों को भारतीय बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।
भारत डेयरी (पनीर सहित), सोया मील और अनाज क्षेत्रों में कोई शुल्क रियायत नहीं देगा। यूरोपीय संघ ने भी अपने चीनी, बीफ, मांस और पोल्ट्री क्षेत्रों में कोई छूट नहीं दी है।
भारत को यूरोपीय संघ में 'टेबल ग्रेप्स' (खाने वाले अंगूर) के लिए कोटा आधारित शुल्क कटौती मिली है। यूरोपीय संघ सालाना लगभग 1.4 अरब डॉलर के टेबल ग्रेप्स का आयात करता है। अधिकारी ने कहा, ''हमें लगभग 10 करोड़ डॉलर यानी 85,000 टन अंगूरों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच मिली है।''
भारत सात वर्षों में शुल्क कम करेगा। उच्च मूल्य वाली वाइन पर शुल्क सात वर्षों में 150 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत हो जाएगा। दूसरी ओर 2.5 यूरो से कम की वाइन के लिए कोई रियायत नहीं होगी।
मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार इस समय दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर है। समझौते के लागू होने पर तीन से चार वर्षों के भीतर इसके 200 अरब डॉलर को पार करने की उम्मीद है। इसी तरह सेवाओं का व्यापार, जो वर्तमान में लगभग 80-85 अरब डॉलर का है, बढ़कर 125 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
इसमें कहा गया कि यह समझौता भारत की ताकत वाले प्रमुख क्षेत्रों जैसे आईटी और आईटीईएस, पेशेवर सेवाओं, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, पर्यटन और निर्माण में ईयू से विस्तृत और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं सुरक्षित करता है।
इस समझौते की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब भारत को अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत के कड़े शुल्क का सामना करना पड़ रहा है। यूरोपीय संघ को भी ग्रीनलैंड मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा नए शुल्क की धमकी का सामना करना पड़ रहा है।
यूरोपीय संघ भारत का 22वां एफटीए भागीदार बन गया है। एनडीए सरकार ने 2014 से मॉरीशस, यूएई, ब्रिटेन, ईएफटीए, ओमान और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते किए हैं और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते की घोषणा की है। भारत ने 2025 में ओमान और ब्रिटेन के साथ व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते के संपन्न होने की घोषणा की।
भाषा पाण्डेय रमण
रमण
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