प्रख्यात मूर्तिकार और कला निर्देशक नूरुद्दीन अहमद को पद्मश्री पुरस्कार मिला
प्रशांत
- 25 Jan 2026, 09:45 PM
- Updated: 09:45 PM
गुवाहाटी, 25 जनवरी (भाषा) असम के प्रख्यात मूर्तिकार और कला निर्देशक नूरुद्दीन अहमद ने रविवार को पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं की सूची में उनका नाम शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
अहमद असम के पांच पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं में शामिल हैं। राज्य से उनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ (मरणोपरांत), कृषि के लिए जोगेश देउरी और कला के लिए पोखिला लेकथेपी और हरिचरण सैकिया का नाम भी इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों की सूची में शामिल हैं।
अहमद ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "कालियाबोर में असम नाट्य सम्मेलन से एक अन्य पुरस्कार प्राप्त करते समय मंच पर रहते हुए ही मुझे इस (पद्म) पुरस्कार की खबर मिली।"
उन्होंने कहा कि कला के क्षेत्र में उनके योगदान को केंद्र सरकार द्वारा मान्यता मिलने से वे 'अत्यंत प्रसन्न' हैं।
अहमद ने कहा, "मैं पुरस्कारों के लिए काम नहीं करता लेकिन मुझे अपनी कला से प्यार है। हालांकि, इस सम्मान ने मेरे दिल को छू लिया है और मुझे और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दी है।"
उन्होंने कहा कि लोगों से मिले 'सम्मान और प्यार' एवं उनकी रचनाओं की सराहना ने उन्हें वर्षों से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है और यह पुरस्कार उन्हें "और अधिक परियोजनाओं पर काम करने के लिए प्रेरित करेगा।"
अहमद ने पुरस्कार के लिए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, राज्य सरकार और केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया।
अहमद राज्य में विभिन्न सांस्कृतिक परियोजनाओं के डिजाइन और क्रियान्वयन में अग्रणी रहे हैं, जिनमें गणतंत्र दिवस परेड में राजकीय झांकी, विभिन्न 'मोबाइल थिएटर' के लिए सेट निर्माण और फिल्मों के लिए मंच डिजाइनिंग शामिल है।
अहमद का जन्म असम के नलबाड़ी जिले के सथिकुची गांव में हुआ था और उन्होंने मुंबई के जे.जे. कॉलेज ऑफ आर्ट्स में थोड़े समय के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
बाद में उन्होंने गढ़ी स्थित ललित कला अकादमी के स्टूडियो में मूर्तिकला में आधुनिक तकनीक के अनुप्रयोग का अध्ययन किया।
उन्होंने सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र से कठपुतली कला में डिप्लोमा भी प्राप्त किया और कठपुतली कला से अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन उनकी जिज्ञासा ने उन्हें न केवल 'मोबाइल थिएटर' तक पहुंचाया, बल्कि उन्होंने परिवेश डिजाइन के क्षेत्र में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई।
अहमद ने कठपुतली कला, नाटक, चित्रकला, मूर्तिकला, वेशभूषा और साजो-सामान पर कई कार्यशालाओं में भाग लिया है और उनका संचालन भी किया है।
अहमद को रंगमंच कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2017 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
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